राजकुमार के 15 डायलॉग, जिन पर दर्शकों की तालियाँ थमने का नाम...

राजकुमार के 15 डायलॉग, जिन पर दर्शकों की तालियाँ थमने का नाम नहीं लेती थीं

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राजकुमार रुपहले पर्दे की वो शख्सियत थे जिनकी संवाद अदायगी सबसे जुदा थी. अपनी दमदार और पैनी आवाज में जब राजकुमार अपने ख़ास अंदाज़ के साथ बोलते तो दर्शक उनके दीवाने हो जाते. आलम ये था कि राजकुमार जिस भी फिल्म में होते उसमें जनता फिल्म देखने कम, उनके धाँसू डायलॉग सुनने ज्यादा जाती थी. कई बार तो इतनी तालियाँ और सीटियाँ बजतीं कि ये सुनना मुश्किल हो जाता था कि आखिर उन्होंने डायलॉग क्या बोला है ?
आज राजकुमार हमारे बीच नहीं हैं लेकिन सिनेमा के डायलॉग्स के रूप में उनकी यादें जरूर मौजूद हैं जो उनके चाहने वालों को आज भी उनकी याद दिला देती हैं. यहाँ पढ़िये उनके कुछ दमदार डायलॉग्स, जिन्हें सुनने के बाद दर्शकों की तालियाँ थमने का नाम नहीं लेती थीं …

#1 जब राजेश्वर दोस्ती निभाता है तो अफसाने लिक्खे जाते हैं..
और जब दुश्मनी करता है तो तारीख़ बन जाती है (फिल्म : सौदागर)

#2  चिनॉय सेठ, जिनके अपने घर शीशे के हों, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते. (फिल्म : वक़्त)

#3 हम अपने कदमों की आहट से हवा का रुख़ बदल देते हैं. (फिल्म : बेताज़ बादशाह)

#4 जानी.. हम तुम्हे मारेंगे, और ज़रूर मारेंगे.. लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी,
गोली भी हमारी होगी और वक़्त भी हमारा होगा. (फिल्म : सौदागर)

#5 हम वो कलेक्टर नहीं जिनका फूंक मारकर तबादला किया जा सकता है. कलेक्टरी तो हम शौक़ से करते हैं, रोज़ी-रोटी के लिए नहीं. दिल्ली तक बात मशहूर है कि राजपाल चौहान के हाथ में तंबाकू का पाइप और जेब में इस्तीफा रहता है. जिस रोज़ इस कुर्सी पर बैठकर हम इंसाफ नहीं कर सकेंगे, उस रोज़ हम इस कुर्सी को छोड़ देंगे. समझ गए चौधरी! (फिल्म : सूर्या)

#6 हम तुम्हे वो मौत देंगे जो ना तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी
और ना ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी. (फिल्म : तिरंगा)

#7 शेर को सांप और बिच्छू काटा नहीं करते.. दूर ही दूर से रेंगते हुए निकल जाते हैं. (फिल्म : सौदागर)

#8 और फिर तुमने सुना होगा तेजा कि जब सिर पर बुरे दिन मंडराते हैं तो ज़बान लंबी हो जाती है. (फिल्म : बुलंदी)

#9 बोटियां नोचने वाला गीदड़, गला फाड़ने से शेर नहीं बन जाता. (फिल्म : मरते दम तक)

#10 इरादा पैदा करो, इरादा. इरादे से आसमान का चांद भी इंसान के कदमों में सजदा करता है. (फिल्म : बुलंदी)

#11 दादा तो दुनिया में सिर्फ दो हैं. एक ऊपर वाला और दूसरे हम. (फिल्म : मरते दम तक)

#12 ना तलवार की धार से, ना गोलियों की बौछार से.. बंदा डरता है तो सिर्फ परवर दिगार से. (फिल्म : तिरंगा)

#13 कौवा ऊंचाई पर बैठने से कबूतर नहीं बन जाता मिनिस्टर साहब! ये क्या हैं और क्या नहीं हैं ये तो वक्त ही दिखलाएगा. (फिल्म : पुलिस पब्लिक)

#14 ताक़त पर तमीज़ की लगाम जरूरी है. लेकिन इतनी नहीं कि बुज़दिली बन जाए. (फिल्म : सौदागर)

#15 जिसके दालान में चंदन का ताड़ होगा वहां तो सांपों का आना-जाना लगा ही रहेगा. (फिल्म : बेताज बादशाह)

 

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