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17 घोड़े

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किसी नगर में एक धनवान सेठ रहता था. उसके पास बेहिसाब दौलत थी लेकिन उसे सबसे ज्यादा प्यार अपने अस्तबल के 17 घोड़ों से था. घोड़ों की देखरेख में कोई कोर-कसर न रह जाए, इस बात का वह विशेष ध्यान रखता था. कभी-कभी उसे चिंता होती थी कि उसके मरने के बाद घोड़ों का क्या होगा. आख़िरकार वह दिन भी आ गया जब सेठ को लगने लगा कि उसका अंत समय नजदीक ही है.

उसने अपने तीनों बेटों को बुलाया और उनसे कहा कि मेरे मरने के बाद मेरी वसीयत के अनुसार सबकुछ आपस में बाँट लेना. साथ ही उसने ताक़ीद की उसके घोड़ों को कोई नुक्सान नहीं पहुंचना चाहिए.

कुछ दिन बाद सेठ स्वर्ग सिधार गया। तीनों लड़कों ने जायदाद का बंटवारा पिता की इच्छा अनुसार कर लिया, मगर घोड़ों को लेकर सब परेशान हो गए. कारण था कि सेठ ने घोड़ों के बंटवारे में पहले लड़के को आधा, दूसरे को एक तिहाई और तीसरे को नौवाँ हिस्सा दिया था. तीनों को समझ में नहीं आ रहा था कि 17 घोड़ों को वे पिता की इच्छा के अनुसार कैसे बांटे ?

तीनों भाई इसी उधेड़बुन में परेशान से 17 घोड़ों के साथ अपने बगीचे में बैठे हुए थे कि तभी एक साधु बाबा अपने घोड़े पर सवार उधर से निकले. तीनों लड़कों ने साधु को प्रणाम किया. साधु उनकी उदासी का कारण पूछा तो उन्होंने पूरी कहानी सुना दी.

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Credit : Youtube.com

साधु बाबा मुस्कुरा कर बोले कि इसमें परेशानी की क्या बात है, हम अभी तुम्हारा बंटवारा करा देते हैं. यह सुनकर तीनों लड़के खुश हो गए.

साधु ने छोटे लड़के से कहा कि मेरा घोडा भी अपने इन 17 घोड़ों में मिला लो. अब सामने कुल 18 घोड़े खड़े थे.

साधु ने बड़े लड़के को बुलाया और उससे कहा कि तुम इनमें से अपने हिस्से के आधे अर्थात् 9 घोड़े ले लो. बड़े लड़के ने 9 घोड़े ले लिए.

अब बचे 9 घोड़े.

अब साधु ने दूसरे लड़के को बुलाया और कहा कि तुम भी अपने हिस्से के एक तिहाई अर्थात् 6 घोड़े ले जाओ.

9 और 6 मिलाकर 15 घोड़े चले गए.

अब बचे 3 घोड़े.

अब साधू ने छोटे लड़के से कहा कि वह भी अपना नौवां हिस्सा अर्थात 2 घोड़े ले ले.

अब 9, 6 और 2 मिलाकर कुल 17 घोड़े लड़कों के बीच बंट चुके थे.  1 घोडा अब भी बचा हुआ था, जिसे लेकर साधू बाबा मुस्कुराते हुए वहाँ से चले गए.

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