मुल्ला नसरुद्दीन के तीन मजेदार किस्से

मुल्ला नसरुद्दीन के तीन मजेदार किस्से

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मुल्ला नसरुद्दीन (Mulla Nasruddin) तुर्की का एक दार्शनिक था जिसके नाम से कई शिक्षाप्रद व मनोरंजक किस्से प्रचलित हैं. हालांकि इन किस्सों की सत्यता के सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इनमें निहित रोचकता के कारण ये पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय हैं.

यहाँ पढ़िये मुल्ला के तीन मजेदार किस्से –

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पाक-साफ़ चोर

एक रात मुल्ला नसरुद्दीन का गधा चोरी हो गया. अगले दिन मुल्ला ने गधे के बारे में पड़ोसियों से पूछताछ की.

चोरी की खबर सुनकर पड़ोसियों ने मुल्ला को लताड़ना शुरू कर दिया. एक ने कहा, “तुमने रात को अस्तबल का दरवाज़ा खुला क्यों छोड़ दिया?”

दूसरे ने कहा, “तुमने रात को चौकसी क्यों नहीं बरती. तुम होशियार रहते तो चोर गधा नहीं चुरा पाता!”

तीसरे ने कहा, “तुम घोड़े बेचकर सोते हो, तभी तुम्हें कुछ सुनाई नहीं दिया जब चोर अस्तबल की कुंडी सरकाकर गधा ले गया”.

यह सब सुनकर मुल्ला ने फनफनाते हुए कहा, “ठीक है भाइयों! जैसा कि आप सभी सही फरमाते हैं, सारा कसूर मेरा है और चोर बेचारा तो पूरा पाक-साफ़ है”.

खरपतवार

एक बार मुल्ला नसरुद्दीन ने अपने बगीचे में फूलों के पौधे लगाए और उनकी खूब देखभाल करने लगा. बसंत आते ही मनमोहक फूलों से उसका बगीचा खिलखिला उठा. तभी उसने देखा कि उसके लगाए फूलों के बीच कुछ जंगली फूल और खरपतवार उग आये हैं. उसने उन्हें फ़ौरन उखाड़कर फेंक दिया.

कुछ दिन बाद देखा तो वही जंगली फूल और खरपतवार फिर से उग आये थे. नसरुद्दीन ने सोचा क्यों न उन्हें खरपतवार दूर करनेवाली दवा का छिडकाव करके नष्ट कर दिया जाए. इस बावत उसने अपने एक मित्र से बात कि तो उसने बताया कि ऐसा करना ठीक नहीं होगा क्योंकि ऐसी दवाएं उसके अच्छे फूलों को भी नुक्सान पहुंचा सकती हैं.

निराश होकर नसरुद्दीन ने किसी अनुभवी माली की सलाह लेने का तय किया. माली के रूप में जो व्यक्ति उसे मिला वह माली होने के साथ-साथ कुछ कुछ दार्शनिक टाइप का भी था. उसने मुल्ला से कहा –

“ये जंगली फूल, ये खरपतवार…”, माली ने कहा, “यह तो शादीशुदा होने की तरह है, जहाँ बहुत सी बातें अच्छीं होतीं हैं तो कुछ अनचाही दिक्कतें और तकलीफें भी पैदा हो जातीं हैं”.

“अब मैं क्या करूं?”, नसरुद्दीन ने पूछा.

“तुम अगर उन्हें प्यार नहीं कर सकते हो तो बस नज़रंदाज़ करना सीखो. इन चीज़ों की तुमने कोई ख्वाहिश तो नहीं की थी लेकिन अब वे तुम्हारे बगीचे का हिस्सा बन गयीं हैं.”

मुल्ला की बीवियाँ

मुल्ला की दो बीवियां थीं जिनमें से एक की उम्र कुछ बुढ़ाने लगी थी जबकि दूसरी अभी जवान थी.

“हम दोनों में से तुम किसे ज्यादा चाहते हो?” – एक दिन बड़ी उम्र की बीवी ने मुल्ला से पूछा.

मुल्ला ने चतुराई से कहा – “मैं तुम दोनों को एक समान चाहता हूँ”.

बूढ़ी बीवी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई. उसने कहा – “मान लो अगर हम दोनों बीवियाँ नदी में गिर जाएँ तो तुम किसे पहले बचाओगे?”

“अरे!” – मुल्ला बोला – “तुम्हें तो तैरना आता है न?”

 

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