परदे का खलनायक, जिसके बारे में स्पीलबर्ग ने कहा था, “अमरीश पुरी...

परदे का खलनायक, जिसके बारे में स्पीलबर्ग ने कहा था, “अमरीश पुरी जैसा न कोई हुआ, न होगा”

0
SHARE

हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी खलनायकों का जिक्र होगा तो सबसे ऊपर दो ही नाम होंगे, गब्बर सिंह और मोगैम्बो. इन दोनों ही खलनायकों ने अपने बेजोड़ अभिनय से सिने प्रेमियों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी कि आज बरसों बाद भी इनके डायलॉग लोगों की जुबान से नहीं उतरे हैं.
साल 1987 में आई फिल्म “मिस्टर इंडिया” में मोगैम्बो का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले अभिनेता थे अमरीश पुरी. इस फ़िल्म का संवाद ‘मोगैम्बो खुश हुआ’, आज भी लोगों के ज़ेहन में बरक़रार है.

अमरीश पुरी का पूरा नाम अमरीश लाल पुरी था. उनका जन्म 22 जून 1932 को नवांशहर, पंजाब में हुआ था. उनके बड़े भाई मदन पुरी भी हिंदी फिल्मों के मशहूर अभिनेता थे.
अमरीश पुरी का फिल्म जगत में पदार्पण काफी लेट हुआ. फिल्मों में आने से पहले उन्होंने 20 साल सरकारी नौकरी की. 1954 में उन्होंने फिल्मों में आने की कोशिश की थी लेकिन निर्माताओं ने उन्हें “क्रूड एंड हार्श फेस” वाला आदमी बता कर ठुकरा दिया.

40 साल की उम्र में उनकी पहली फिल्म आई थी जिसका नाम था “रेशमा और शेरा”. लेकिन इसके बाद वे इतने व्यस्त हुए कि फिर लगभग 400 फिल्मों में अभिनय कर डाला. एक वक़्त ऐसा भी आया कि वे बॉलीवुड के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले खलनायक बन गए. कुछ फिल्मों में तो उन्होंने हीरो से भी ज्यादा फीस ली.
बॉलीवुड ही नहीं, अमरीश पुरी ने हॉलीवुड में भी अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवाया. उन्होंने स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म  ‘इंडिआना जोंस एंड द टेम्पल ऑफ डूम’ में मोला राम का किरदार निभाया. उनके हॉलीवुड फैन उन्हें आज भी इसी नाम से जानते हैं. इस फिल्म में अमरीश पुरी का अभिनय देखकर स्टीवन स्पीलबर्ग ने कहा था, “अमरीश पुरी जैसा अभिनेता दूसरा नहीं हो सकता. वे मेरे सबसे पसंदीदा विलेन हैं.”

और उन्होंने सच ही तो कहा था. आखिर वो दमदार आवाज, वो लम्बी चौड़ी कदकाठी, गोल गोल घूमती वो आँखें जो बिना डायलॉग बोले ही लोगों को डराने की क्षमता रखती थी, इतना सब एक साथ किसी और में कहाँ से मिलेगा.
अमरीश पुरी ने बॉलीवुड के लगभग सभी नायकों के सामने खलनायक का किरदार निभाया. उनके खाते में आक्रोश, अर्द्धसत्य, भूमिका, चाची 420, दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे, दामिनी, गर्दिश, गदर, घातक, घायल, हीरो, करण अर्जुन, कोयला, मंथन, मेरी जंग, मि. इण्डिया, मुस्कराहट, नगीना, फूल और कांटे, राम लखन, ताल आदि ऐसी अनेक यादगार फ़िल्में हैं.
लेकिन ऐसा नहीं कि अमरीश पुरी पूरी ज़िन्दगी सिर्फ खलनायक ही बने रहे. उन्होंने चरित्र भूमिकाएं भी बखूबी निभाईं. राजकुमार संतोषी की “घातक” में सनी देओल के बीमार पिता का जो रोल उन्होंने निभाया वह कोई और नहीं कर सकता था. “दिलवाले दुल्हनियां ले जायेंगे” में काजोल के पिता का किरदार कोई कैसे भूल सकता है.

12 जनवरी 2005 को बॉलीवुड का ये दिग्गज अभिनेता इस संसार को अलविदा कह कर चला गया. आज भी उनकी खाली जगह को दूसरा कोई अभिनेता भर नहीं पाया है.

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY