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देश का पहला मुक्तिधाम, जिसे हवाई अड्डे की तर्ज पर बनाया गया है

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मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है और उसे किसी भी हाल में टाला नहीं जा सकता. ये जानने के बावजूद भी किसी भी मनुष्य के जीवन में सबसे दुखद क्षण वे ही होते हैं जब वह अपने किसी प्रियजन को अंतिम विदाई देने श्मशान जाता है.
मृतक के परिजनों के दुःख को हल्का करने की कोशिश के रूप में गुजरात में एक शवदाह गृह को हवाई अड्डे का रूप दिया गया है. सोच ये है कि श्मशान का वातावरण पारंपरिक रूप से कुछ अलग होने से शोकाकुल परिवार का ध्यान बँटेगा और उनका दुःख कुछ हल्का होगा. गुजरात के बारडोली में स्थित इस शवदाह गृह का नाम भी बदलकर ‘अंतिम उड़ान मोक्ष एअरपोर्ट’ कर दिया गया है.

इतना ही नहीं, जैसे ही इस शवदाह गृह में शवयात्रा प्रवेश करती है यहाँ हवाई अड्डे की तरह ही अनाउन्समेंट भी किया जाता है जिसके जरिये परिजनों को अंतिम संस्कार हेतु गाइड किया जाता है.

शवदाह हेतु इस शवदाह गृह में दो हवाईजहाजों की प्रतिकृतियाँ बनाई गई हैं. इन्हें भी नाम दिए गए हैं ‘मोक्ष एयरलाइन्स’ और ‘स्वर्ग एयरलाइन्स’. शवदाह के समय इनमें से हवाई जहाज के चलने जैसी आवाज भी निकलती है.

बारडोली में मिन्धोला नदी के किनारे स्थित इस श्मशान को अब लोग ‘मोक्ष एअरपोर्ट’ के नाम से जानने लगे हैं. आसपास के लगभग 40 गाँवों के लोग इस शवदाहगृह में अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार हेतु आते हैं.

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