ये हैं वो शख्सियत, जिनका किरदार अक्षयकुमार ने ‘पैडमैन’ में निभाया है

ये हैं वो शख्सियत, जिनका किरदार अक्षयकुमार ने ‘पैडमैन’ में निभाया है

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अक्षयकुमार इन दिनों लड़ाई मारधाड़ और फूहड़ कॉमेडी से हटकर सामाजिक सन्देश देने वाली फ़िल्में दे रहे हैं. इसी साल उनकी ‘टॉयलेट, एक प्रेमकथा’ ने सफलता के कई रिकॉर्ड तोड़े थे तो एक और ऐसी ही फिल्म ‘पैडमैन’ बनकर तैयार है. ये फिल्म महिलाओं के लिए सस्ता सेनेटरी नैपकिन डिजाईन करने वाले एक व्यक्ति के जीवन पर आधारित है जिन्हें सचमुच दुनिया भर में ‘पैडमैन’ के नाम से जाना जाता है. क्या आप जानते वह व्यक्ति कौन हैं ?

इनका नाम है अरुणाचलम मुरुगनाथन. ये तमिलनाडु के कोयम्बतूर के रहने वाले हैं. इनका जन्म एक बेहद गरीब परिवार में 1962 में हुआ था. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनकी स्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी. हालांकि बाद में उन्होंने कुछ ऐसा किया कि भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया. इतना ही नहीं उनका नाम एक बार दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भी आया.

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एक इंटरव्यू के दौरान अरुणाचलम ने बताया था कि आखिर उन्हें महिलाओं के लिए सेनेटरी नैपकिन बनाने का विचार कैसे आया. उन्होंने बताया कि उनकी शादी के कुछ दिनों बाद उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी उनसे कुछ छिपा रही है. उन्होंने पत्नी से पूछा कि क्या छिपा रही हो तो पत्नी ने सकुचाते हुए मना कर दिया और कहा कि ये तुम्हारे काम की चीज़ नहीं है.

लेकिन अरुणाचलम नही माने और पत्नी के पीछे लग गए. उन्होंने देखा कि पत्नी जो छिपा रही थी वह एक गन्दा और बदबूदार कपडा था जिस पर खून के धब्बे लगे थे. उस दिन उन्हें अहसास हुआ कि पीरियड्स के दौरान महिलायें कितने अस्वास्थ्यकर तरीकों को अपनाती हैं. उन्होंने तभी फैसला किया कि वे इसके लिए कुछ करेंगे.

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आम भारतीय पुरुषों की तरह इससे पहले वे भी महिलाओं के पीरियड्स के विषय में अधिक नहीं जानते थे. उन्होंने इस ओर ध्यान दिया तो पाया कि उनकी पत्नी ही नहीं, गाँव देहात की लगभग सभी महिलायें पीरियड्स के दौरान इसी तरह के गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं.

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उन्होंने हाथों से कॉटन के सेनेटरी पैड बनाना शुरू किया तो लोग उन्हें पागल समझने लगे. यहाँ तक कि महिलाओं ने भी उन्हें सनकी ही समझा. और तो और जिस पत्नी की खातिर उन्हें ये धुन सवार हुई थे वे भी नाराज होकर घर से चली गईं. पर वे अपनी धुन के पक्के थे और लगे रहे. अपने बनाए सेनेटरी पैड खुद के ऊपर ही टेस्ट किये. इसके लिए तरह तरह के जतन किये, बहुत सारे लांछन झेले, गाँव से निकाले गए आदि आदि. ये सब संभवतः आपको फिल्म में देखने को मिले.

आखिरकार वे एक ऐसी मशीन बनाने में सफल रहे, जिससे सस्ते नैपकिन बनाए जा सकते थे. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी ने उनकी मशीन एक नेशनल अवार्ड प्रतियोगिता में रखी जहां उसे 943 प्रतिस्पर्धियों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त हुआ. उन्हें ये अवार्ड तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा प्रदान किया गया और इसी के साथ सब बदल गया. वे लाइमलाइट में आ गए.

अरुणाचलम मुरुगनाथन एक ऐसे जीवट से परिपूर्ण व्यक्ति हैं जिन्होंने जीवन में बहुत कुछ झेला पर अपने उद्देश्य का परित्याग नहीं किया. उनके ऊपर ‘Menstrual Man’ नाम से एक डाक्यूमेंट्री बन चुकी है और अब अक्षयकुमार की ये फिल्म ‘पैडमैन’ आ रही है. उम्मीद है ये फिल्म भी ‘टॉयलेट …’ की तरह सफल होगी.

 

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