2009 में इस सिक्के की कीमत थी 36 पैसे, आज बिक रहा...

2009 में इस सिक्के की कीमत थी 36 पैसे, आज बिक रहा है साढ़े 6 लाख रुपये में

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न सोने का है न चांदी का है, न ही इसमें हीरे मोती जड़े हैं, देखा जाए तो कुछ है ही नहीं बस हवा है पर इस समय इसी हवाई सिक्के ने दुनिया में मंहगाई के मामले में बहुमूल्य धातुओं को कोसों पीछे छोड़ रखा है. हम बात कर रहे हैं डिजिटल करेंसी बिटकॉइन की जो आज दुनिया भर के मीडिया की सुर्ख़ियों में छाया हुआ है. वजह है इसकी आसमान छूती कीमतें.

अब तक आप डॉलर और पौण्ड को ही सबसे मंहगी करेंसी समझते होंगे लेकिन जहां एक डॉलर की कीमत 64 रुपये, एक पाउंड की कीमत 86 रुपये ही है तो एक आज एक बिटकॉइन की कीमत साढ़े 6 लाख रुपये के आसपास है. ख़ास बात ये है कि ये न तो किसी देश की करेंसी है और न ही इसका भौतिक रूप से कोई वजूद है. और तो और दुनिया भर में सरकारें इसे मान्यता भी नहीं देतीं फिर भी इन्टरनेट के जरिये धड़ल्ले से इसका प्रचलन हो रहा है और इसकी कीमतें आसमान छू चुकी हैं.

यह एक शुद्ध रूप से डिजिटल करेंसी है जिसे न तो कहीं छापा जाता है और न ही कहीं स्टोर किया जाता है. यह बस एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर के बीच में लेनदेन के समय ट्रान्सफर होती है. आज दुनिया भर में इसका प्रचलन होने लगा है. आप इसके जरिये सामान खरीद सकते हैं, होटल बुक करा सकते हैं, कई कम्पनियां इसके जरिये पेमेंट स्वीकार करती हैं.

बिटकॉइन जनवरी 2009 में अस्तित्व में आया था. तब इसकी कीमत 36 पैसे के आसपास थी और कोई भी इसे गंभीरता से नहीं लेता था. लेकिन धीरे धीरे यह करेंसी लोकप्रिय होती गई. आज यह एक तरह से दुर्लभ बन चुकी है क्योंकि अब इसकी कीमत साढ़े 6 लाख रुपये के आसपास चल रही है. इसकी लोकप्रियता की वजह रही इसका बेहद सुरक्षित होना और इसके लेनदेन में कोई शुल्क न लगना.  साथ ही लोग इसे भविष्य की करेंसी मान रहे हैं.

दुनिया भर में विदेशी मुद्रा का कारोबार करने के लिए एक्सचेंज होते हैं इसी तरह बिटकॉइन का कारोबार करने के लिए भी ऑनलाइन एक्सचेंज बन गए हैं जहाँ आप बिटकॉइन खरीद या बेच सकते हैं. बिटकॉइन बनाए भी जा सकते हैं. यह प्रक्रिया बिटकॉइन माइनिंग कहलाती है. इसमें पावरफुल कंप्यूटरों के जरिये जटिल गणितीय समस्याओं को सुलझाना होता है जिससे बिटकॉइन उत्पन्न होता है. लेकिन यह प्रक्रिया बेहद खर्चीली और जटिल है और आज के समय में इसे फायदे का सौदा नहीं माना जाता.

लेकिन बिटकॉइन अकेली क्रिप्टोकरेंसी (डिजिटल करेंसी को यही नाम दिया गया है) नहीं है. इसकी देखा देखी और भी इसी तरह की कई करेंसियाँ बाजार में आ चुकी हैं जिनमें ईथर, लाइटकॉइन, जेडकैश आदि उल्लेखनीय हैं. हालांकि इन करेंसियों की कीमत बिटकॉइन के मुकाबले बहुत कम है.

बिटकॉइन के आविष्कार का श्रेय सातोशी नकोमोतो नामक एक कंप्यूटर इंजीनियर को जाता है. हालांकि ये साहब कौन हैं और कहाँ रहते हैं ये कोई नहीं जानता.

 

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