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चौधरी की तपस्या

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एक बार हरियाणा के एक गाँव में काफी दिनों तक बारिश नहीं हुई तो गाँव के कुछ लोगों ने चौधरी साहब से कहा – “चौधरी साहब तपस्या कर लो, बारिश हो ज्यागी …!”

चौधरी साहब ने सोचा चलो सबकी भलाई के लिए तपस्या कर लेते हैं, यूँ भी घर बैठे-बैठे कर ही क्या रहे हैं. 

indradev

तो चौधरी साहब बैठ गए गाँव के बाहर एक पेड़ के नीचे तपस्या करने. आखिर एक दिन उनकी तपस्या से खुश होकर इन्द्रदेव प्रकट हुए और बोले – “चौधरी, मैं तेरी तपस्या से बहुत खुश हूँ … बोल तुझे क्या चाहिए ?”

चौधरी साहब बोले – “मने किसी चीज़ की कमी ना सै … खेत खलिहान, पोता- पोती सब है भगवान की दया तै … बस तू ये गाँव वालण की खातर बारिश करवा दे !”

इन्द्रदेव बोले – “बारिश तो मैं करवा ही दूंगा …. तू अपनी खातिर भी कुछ मांग ले !”

चौधरी साहब ने अपने लिए कुछ मांगने से फिर इनकार कर दिया, पर इन्द्रदेव उनसे कुछ मांगने के लिए जिद करने लगे. 

तब चौधरी साहब बोले – “चाल तू इतनी जिद कर रहा है तो …. नु कर कि एक बेर मने फूफा कह दे …!!!”

*इन्द्रदेव बेहोश*

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