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तीसरी कक्षा तक पढ़े किसान ने खेत में कचरा डालने वाली कंपनी से लड़ने के लिए 16 साल तक पढ़ा क़ानून, जीता मुकदमा

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दृढ़ निश्चय और प्रबल इच्छाशक्ति के बल पर इंसान जिंदगी में चाहे जो कर सकता है. चुनौती कितनी ही बड़ी हो, आप कितने ही कमजोर हों, लेकिन यदि ये दो हथियार आपके पास हैं तो जीत आपकी ही होगी.

चीन के मात्र तीसरी कक्षा तक पढ़े एक किसान ने अपनी प्रबल इच्छाशक्ति और दृढ़ निश्चय के बलबूते पर अन्यायपूर्ण तरीके से उसके खेत में कचरा डाल रही एक सरकारी कंपनी को उसकी औकात दिखा दी है. 

चीन के Heilongjiang के 60 वर्षीय किसान वांग एलिन के खेतों में एक सरकारी कंपनी Qihua Group नाजायज तरीके से रासायनिक कचरा डाल रही थी जिससे उनकी व उनके गाँव के अन्य किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन बर्बाद हो रही थी.

पहलेपहल वांग ने इसकी शिकायत स्थानीय अधिकारीयों से की लेकिन उन्होंने कंपनी के खिलाफ कोई कार्यवाही करने से इनकार कर दिया. उन्होंने वांग से कहा कि पहले वह वैधानिक सबूत लेकर आये कि सचमुच उसके खेत को कोई नुक्सान पहुंचा है.

वांग जानता था कि वही सही है लेकिन इस बात को कानूनी रूप से कैसे साबित करना है, यह वह नहीं जानता था. लिहाजा उसी वक़्त उसने खुद क़ानून पढ़ने का फैसला कर लिया.

लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था. किताबें खरीदने के लिए पैसे नहीं थे तो उसने एक लोकल बुक स्टोर मालिक से अनाज के बदले किताबें पढ़ने की सहूलियत देने का समझौता किया. वह रोज वहाँ जाकर क़ानून की किताबें पढ़ता और जरूरी बातें नोट करके लाता.

इस तरह 16 साल तक उसने पढ़ाई की और इस लायक हो गया कि वह कंपनी के खिलाफ एक मजबूत मुकदमा दायर कर सके. 2015 में अदालत में केस की सुनवाई शुरू हुई और वांग ने एक मिसाल कायम करते हुए पहला राउंड जीत लिया है.

हालांकि कंपनी ने फैसले के खिलाफ अपील की है लेकिन अब वांग को कोई डर नहीं है और उसने भी अंत तक लड़ने का निश्चय कर रखा है.

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती !


(Story Source : scmp)

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