गाँव को पानी मिल सके इसलिए इस शख्स ने ज़िन्दगी के 36...

गाँव को पानी मिल सके इसलिए इस शख्स ने ज़िन्दगी के 36 साल लगा दिए ये नहर खोदने में

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किसी हिंदी फिल्म का एक गाना है – “अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ऐ दिल ज़माने के लिए”.

दुनिया में ज्यादातर लोग अपने या अपने परिवार के लिए जीते हैं लेकिन कुछ लोग होते हैं जो ज़माने के लिए जीते हैं. हमारे देश में एक दशरथ मांझी हुए. पूरी ज़िन्दगी पहाड़ काटने में खपा दी ताकि गाँव के लोगों को रास्ता मिल सके.
ये कहानी भी एक दशरथ मांझी की है, पर ये भारत के नहीं, चीन के हैं.

दक्षिण-पश्चिमी चीन के पर्वतीय क्षेत्र Guizhou  के एक गाँव में   पानी की समस्या थी. एक स्थानीय निवासी ने अपने गाँव को इस समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने का बीड़ा उठाया.

ऊँचे पहाड़ों पर स्थित पानी के स्रोत से अपने गाँव तक एक छोटी नहर खोदनी शुरू कर दी. पचास के थे जब काम शुरू किया था. 36 साल लग गए, तब कहीं जाकर आखिर उनके गाँव में पानी आ गया.

इस काम में बीच बीच में गाँववाले भी उनकी मदद करते रहे. पर इस चीनी दशरथ मांझी ने इस सामाजिक काम को भी अपने व्यक्तिगत काम की तरह लिया और सबकुछ छोड़छाड़ कर उसी में जुटे रहे.

जैसा कि आप तस्वीरों में देख सकते हैं, ये नहर पहाड़ के किनारे किनारे खोदी गई है. स्पष्ट है कि खुदाई आसान तो बिलकुल नहीं रही होगी, नहीं तो 36 साल क्यों लगते. चीन की Xinhua न्यूज़ एजेंसी के अनुसार नहर की लम्बाई कुल 9400 मीटर है.

 

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