चोरी की सजा

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चोरी की सजा – A Motivational Story –

बहुत समय पहले एक गुरूजी थे जो अपने छात्रों को उत्तम शिक्षा देने के लिए प्रसिद्ध थे. उनके गुरुकुल में दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे. एक बार उनके आश्रम में एक ऐसा छात्र आया जिसे चोरी करने की बुरी आदत थी.

आने के कुछ ही दिन बाद वह दूसरे छात्रों का सामान चुराते हुए पकड़ा गया. सभी छात्र उसे पकड़कर गुरूजी के पास लाये और सजा देने का आग्रह किया. गुरूजी ने उसे कुछ विशेष नहीं कहा बस मामूली समझाइश देकर छोड़ दिया.

कुछ दिनों बाद वही छात्र फिर चोरी करते पकड़ा गया. फिर से सभी छात्र उसे पकड़कर गुरूजी के समक्ष लाये और उस छात्र को गुरुकुल से निकाल देने की मांग की.

मगर गुरूजी ने फिर भी उसे कुछ न कहकर जाने दिया. यह देखकर अन्य छात्रों को बहुत गुस्सा आया. उन सबने मिलकर गुरूजी के नाम एक पत्र लिखा जिसमें लिखा था कि यदि उन्होंने उस चोर छात्र को गुरुकुल से नहीं निकाला तो हम सभी गुरुकुल छोड़कर चले जायेंगे.

गुरूजी ने जैसे ही पत्र पढ़ा, उन्होंने सभी छात्रों को अपने सामने बुलाया और कहा – “आप लोग जानते हैं कि क्या सही है और क्या गलत. यदि आप लोग मेरा गुरुकुल छोड़कर किसी अन्य गुरुकुल में पढ़ने जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं. परन्तु ये बेचारा तो ये भी नहीं जानता कि क्या सही है और क्या गलत ? यदि  इसे  मैं  नहीं  पढ़ाऊंगा   तो  और  कौन  पढ़ायेगा ?  आप  सभी  चले  भी  जाएं  तो  भी  मैं  इसे  यहाँ  पढ़ाऊंगा .”

गुरूजी के ये शब्द सुनते ही चोरी करने वाला छात्र फूट-फूट कर रोने लगा. फिर इसके बाद उसने जीवन में कभी चोरी नहीं की.

 

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