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दसवीं में पढ़ने वाले आकाश ने बनाई ऐसी डिवाइस जो बचाएगी हजारों जिंदगियां

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तमिलनाडु के एक 10वीं कक्षा के छात्र ने एक ऐसी डिवाइस का आविष्कार किया है जिससे हजारों लोगों को असमय काल के गाल में जाने से बचाया जा सकता है. आकाश मनोज नामक इस छात्र ने एक ऐसी डिवाइस बनाई है जिससे साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाया जा सकेगा.

इस डिवाइस के जरिये व्यक्ति के शरीर में हार्ट अटैक की संभावना का पता चलाया जा सकेगा. पहले ही पता चलने पर व्यक्ति को समय रहते उपचार मिल सकेगा जिससे उसकी जान बच सकती है. बहुत से लोग ह्रदय सम्बन्धी बीमारी से पीड़ित होते हैं लेकिन कोई लक्षण दिखाई न देने के कारण समय रहते इलाज नहीं करा पाते और हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं. यह डिवाइस ह्रदय से सम्बंधित गड़बड़ी को पहले ही बता देगी.

आकाश के दादाजी की एकाएक हार्ट अटैक आने से मृत्यु हो गई थी. उन्हें भी हृदयाघात के कोई लक्षण नहीं थे और पूर्णतः स्वस्थ मालूम पड़ते थे. इस घटना से आकाश के मन को गहरा धक्का लगा और वे ऐसी चीज़ बनाने के प्रयास में लग गए जिससे ऊपर से स्वस्थ दिखाई देने वाले व्यक्तियों में भी ह्रदय सम्बन्धी गड़बड़ी का पता लगाया जा सके.

आकाश को 8वीं कक्षा से ही मेडिकल सब्जेक्ट्स में गहन रूचि है और 10वीं तक आते आते उन्होंने यह कारनामा कर दिखाया है. इसके लिए अध्ययन हेतु वे रोज अपने गृहनगर से एक घंटे की दूरी पर स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बेंगलुरु में मेडिकल जर्नल्स पढ़ने आते थे. संस्थान की लाइब्रेरी में वे अब तक इतने जर्नल्स पढ़ चुके हैं जिनकी कुल कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक होगी.

अपनी डिवाइस की तकनीक के बारे में बताते हुए आकाश ने कहा है कि रक्त में मौजूद एक प्रोटीन FABP3 के एनालिसिस से हृदयाघात की सम्भावना का पता चलाया जा सकता है. उनकी डिवाइस का UV लाइट त्वचा के पार जाकर सेंसर की सहायता से इस प्रोटीन का पता लगा लेता है.

आकाश अभी बहुत छोटे हैं लेकिन उनके सपने बहुत बड़े हैं. वे भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. उनकी इस खोज के लिए उन्हें इनोवेशन स्कॉलर इन रेजिडेंस प्रोग्राम के तहत सम्मानित करने हेतु राष्ट्रपति भवन में बुलाया गया था.


(Story Source : HT)

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