Shayari – Faiz Ahmad Faiz

A collection of selected poems (ghazals, nazms, shayaris) of Great Urdu poet – Faiz Ahmad Faiz

हम देखेंगे – (फैज़ अहमद फैज़ की एक नज़्म)

Hum Dekhenge – is a famous revolutionary nazm (poetry) by Pakistani Shayar Faiz Ahmad Faiz.

हम देखेंगे
लाजिम है कि हम भी देखेंगे
हम देखेंगे

वो दिन के जिसका वादा है
जो लाह-ए-अज़ल में लिखा है
हम देखेंगे

जब ज़ुल्मो सितम के कोहे-गिरां
रूई की तरह उड़ जायेंगे
हम महकूमों के पाओं तले
ये धरती धड़ धड़ धड्केगी
और अहल-ए-हकम के सर ऊपर
जब बिजली कड़ कड़ कड़केगी

हम देखेंगे

जब अर्ज़-ए-खुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जायेंगे
हम अहल-ए-सफा मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाये जायेंगे
सब ताज उछाले जायेंगे
सब तख़्त गिराए जायेंगे

हम देखेंगे

बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो गायब भी हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर भी
उट्ठेगा ‘अनल-हक’ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज करेगी खल्क-ए-खुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो

हम देखेंगे
लाजिम है कि हम भी देखेंगे
हम देखेंगे

चंद रोज़ और – A Nazm by Faiz Ahmed Faiz

चंद रोज़ और मेरी जान फक़त चंद ही रोज़
ज़ुल्म की छाँव में दम लेने पर मजबूर हैं हम
इक ज़रा और सितम सह लें, तड़प लें, रो लें
अपने अजदाद की मीरास है माजूर हैं हम

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