Aye Kuchh Abra – Ghazal by ‘Faiz Ahmad Faiz’

Aye Kuchh Abra – Ghazal by ‘Faiz Ahmad Faiz’

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आए कुछ अब्र, कुछ शराब आए
उसके बाद आए जो अज़ाब आए

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे
दस्त-ए-साकी में आफ़ताब आए

हर रग-ए-खूँ में फिर चरागां हो
सामने फिर वो बेनक़ाब आए

कर रहा था गम-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए

ना गई तेरे गम की सरदारी
दिल में यूँ रोज़ इंकलाब आए

‘फैज़’ थी राह सर बसर मंजिल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए
– फैज़ अहमद फैज़

 

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