Jab Nazar Aapki Ho Gai Hai (Ghazal by Firaq Gorakhpuri)

Jab Nazar Aapki Ho Gai Hai (Ghazal by Firaq Gorakhpuri)

0
SHARE

जब नज़र आपकी हो गई है
ज़िन्दगी ज़िन्दगी हो गई है

बारहा बर-खिलाफ-ए-हर-उम्मीद
दोस्ती दुश्मनी हो गई है

है वो तकमील पुरकारियों की
जो मेरी सादगी हो गई है
[तकमील – completion ; पुरकारी – slyness / cunning]

तेरी हर पुरशिश-ओ-मेहरबानी
अब मेरी बेकसी हो गई है

भूल बैठा है तू कह के जो बात
वो मेरी ज़िन्दगी हो गई है

बज़्म में आँख उठाने की तकसीर
ऐ ‘फिराक’ आज भी हो गई है
[तकसीर – mistake]

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY