Raat bhi neend bhi kahaani bhi (Ghazal by Firaq Gorakhpuri)

Raat bhi neend bhi kahaani bhi (Ghazal by Firaq Gorakhpuri)

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रात भी नींद भी कहानी भी
हाय क्या चीज़ है जवानी भी

एक पैगाम-ए-जिंदगानी भी
आशिक़ी मर्ग-ए-नागहानी भी

इस अदा का तेरी जवाब नहीं
मेहरबानी भी सरगरानी भी

दिल को अपने भी गम थे दुनिया में
कुछ बलाएँ थी आसमानी भी 

दिल को शोलों से करती है सैराब
ज़िन्दगी आग भी है पानी भी

लाख हुस्न-ए-यकीं से बढ़कर है
इन निगाहों कि बदगुमानी भी

खल्क  क्या-क्या मुझे नहीं कहती
कुछ सुनूँ मैं तेरी जबानी भी

अपनी मासूमियों के परदे में
हो गई वो नज़र सयानी भी

दिन को सूरजमुखी है वो नौगुल
रात को वो है रातरानी भी

दिल-ए-बदनाम तेरे बारे में
लोग कहते हैं इक कहानी भी

सर से पा तक सपुर्दगी की अदा
एक अंदाज़-ए-तुर्कमानी भी

ज़िन्दगी ऐन दीद-ए-यार ‘फ़िराक’
ज़िन्दगी हिज्र की कहानी भी

 

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