Home Shayari in Hindi Meer Taqi Meer Ashq aankhon me (Ghazal by Meer)

Ashq aankhon me (Ghazal by Meer)

0

अश्क आँखों में कब नहीं आता
लहू आता है जब नहीं आता

होश जाता नहीं रहा लेकिन
जब वो आता है तब नहीं आता

दिल से रुखसत हुई कोई ख्वाहिश
गिरिया कुछ बेसबब नहीं आता

इश्क़ का हौसला है शर्त वरना
बात का किस को ढब नहीं आता

जी में क्या-क्या है अपने ए हमदम
हर सुख़न ता ब-लब नहीं आता

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here