Wo jo ham men tum men qaraar tha –

Wo jo ham men tum men qaraar tha – [Momin Shairy in Hindi]

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वो जो हम में तुम में करार था, तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही यानी वादा निबाह का, तुम्हें याद हो कि न याद हो

वो नए गिले वो शिकायतें, वो मज़े-मज़े की हिकायतें
वो हरेक बात पे रूठना, तुम्हें याद हो कि न याद हो

कोई बात ऐसी अगर हुई जो तुम्हारे जी को बुरी लगी
तो बयाँ से पहले ही भूलना, तुम्हें याद हो कि न याद हो

सुनो ज़िक्र है कई साल का, कोई वादा मुझ से था आपका
वो निबाहने का ज़िक्र क्या, तुम्हें याद हो कि न याद हो

कभी हम में तुम में भी चाह थी, कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आशना, तुम्हें याद हो कि न याद हो

कभी बैठे सब हैं जो रू-ब-रू, तो इशारतों से ही गुफ्तगू
वो बयान शौक़ का बरमला, तुम्हें याद हो कि न याद हो

जिसे आप गिनते थे आशना, जिसे आप कहते थे बावफ़ा
मैं वही हूँ ‘मोमिन’-ए-मुब्तला, तुम्हें याद हो कि न याद हो

 

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