Gai Vo Baat Ki

Gai Vo Baat Ki [By Mirza Ghalib]

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गई वो बात कि हो गुफ़्तगू तो क्योंकर हो
कहे से कुछ न हुआ फिर कहो तो क्योंकर हो

हमारे ज़हन में इस फिक्र का है नाम विसाल
कि गर न हो तो कहाँ जाएं हो तो क्योंकर हो

उलझते हो तुम अगर देखते हो आईना
जो तुम से शहर में हों एक दो तो क्योंकर हो

हमें फिर उनसे उमीद और उन्हें हमारी क़द्र
हमारी बात ही पूछे न वो तो क्योंकर हो

 

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