मुझको गम क्या है – Mirza Ghalib Poetry

मुझको गम क्या है – Mirza Ghalib Poetry

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बहुत सही गम-ए-गेती शराब कम क्या है
गुलाम-ए-साकी-ए-कौसर हूँ मुझको गम क्या है 
(गम-ए-गेती = Sorrows of the world, गुलाम-ए-साकी-ए-कौसर = Servant of the person who serves drinks from ‘Kausar’, a river which flows in heaven)

तुम्हारी तर्ज़-ओ-रविश जानते हैं हम क्या है
रकीब पर है अगर लुत्फ़ तो सितम क्या है
(तर्ज़-ओ-रविश= behaviour and character, रकीब = rival, लुत्फ़ = benevolence, सितम = torture)

सुखन में खामा-ए-ग़ालिब की आतश अफशां
यकीं है हमको भी लेकिन अब उसमें दम क्या है
(सुखन = poem, खामा-ए-ग़ालिब = Ghalib’s pen, आतश-अफशां = to pour fire)

– Mirza Ghalib

 

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