अदालत ने किसान को बना दिया शताब्दी ट्रेन का मालिक

अदालत ने किसान को बना दिया शताब्दी ट्रेन का मालिक

0
SHARE

अदालतें कई बार ऐसे चौंकाने वाले फैसले देती हैं जिन पर सहज विश्वास नहीं होता. ऐसा ही एक चौंकाने वाला फैसला दिया पंजाब के लुधियाना कोर्ट ने, जिसमें एक ट्रेन को एक किसान के नाम कर देने की बात कही गई है.

मीडिया में आ रहीं ख़बरों के अनुसार पंजाब के एक किसान समपूरण सिंह रेलवे के मुआवजे से जुड़े एक मामले को कोर्ट ले गए और फैसले में अदालत ने उन्हें स्वर्ण शताब्दी नामक ट्रेन का मालिक ही बना दिया.

ichowk

समपूरण सिंह ने रेलवे से अपनी अधिग्रहित जमीन का मुआवजा लेने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे ट्रेक के लिए उनकी जमीन ले ली गई थी जिसका मुआवजा करीब 1.47 करोड़ रुपये होता था. रेलवे ने उन्हें मात्र 42 लाख रुपये ही दिए.

जब रेलवे ने किसान को पूरा मुआवजा देने के अदालत के आदेश की भी अनदेखी की तो दूसरी सुनवाई में अदालत ने अमृतसर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस को ही किसान के नाम कर दिया और उसे ट्रेन को घर ले जाने की इजाजत दे दी. अदालत ने स्टेशन मास्टर के दफ़्तर को भी जब्त करने के आदेश दिए.

अब अदालत ने ट्रेन तो किसान को दे दी पर वह बेचारा उसे घर कैसे ले जाता. फिर भी, ट्रेन पर कब्जा लेने के लिए किसान अपने वकील के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचा. कोर्ट का आदेश पत्र सौंपा पर रेलवे के सेक्शन इंजिनियर ने ट्रेन को किसान के कब्जे में जाने से रोक दिया. उसे बताया गया कि ट्रेन कोर्ट की संपत्ति है.

बहरहाल, रेलवे ने विधि मंत्रालय को इस मामले को देखने को कहा है. पर सवाल ये हैं कि अगर कहीं सचमुच किसान को ट्रेन ले जानी पड़ी तो बेचारा कैसे ले जाएगा और उसका करेगा क्या ?

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY