कभी लोग पागल समझते थे, आज मिला है पद्मश्री सम्मान

कभी लोग पागल समझते थे, आज मिला है पद्मश्री सम्मान

0
SHARE

इस बार के पद्म सम्मान कुछ ख़ास हैं क्योंकि इस बार कुछ ऐसे आम लोगों को भी यह सम्मान दिया जा रहा है जिनके बारे में अब तक कोई जानता नहीं था. ऐसे ही एक व्यक्ति हैं तेलंगाना के खमाम जिले के रेड्डीपल्ले गाँव के 70 वर्षीय दरीपल्ली रमैया, जिन्हें इस बार पद्मश्री सम्मान हेतु चुना गया है.

Logical Indian

आपने अपनी ज़िन्दगी में कितने पौधे लगाए होंगे ? दस ? बीस ? या पचास ? रमैया ने अपनी ज़िन्दगी में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए हैं और लगाते ही जा रहे हैं. स्थिति ये हैं कि उनकी नजर में कहीं भी बंजर धरती आई नहीं, कि उन्होंने वहाँ पौधे रोपने का काम शुरू किया नहीं.

कभी पौधे लगाने की उनकी इस सनक की वजह से गाँव के लोग उन्हें पागल समझते थे लेकिन आज उसी गाँव में वे सेलेब्रिटी बन गए हैं क्योंकि उन्हें उनके इस जूनून की वजह से पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है.

पेड़ पौधे रमैया की ज़िन्दगी हैं. जब भी कहीं कोई पौधा सूखता है या मरता है तो उन्हें लगता हैं कि उनकी अपनी जान निकल गई है. इसीलिए वे सिर्फ पौधे लगाते ही नहीं हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि वह पौधा जिए और बड़ा हो.

 

रमैया सिर्फ दसवीं तक ही पढ़े हैं लेकिन आज भी यदि उन्हें पेड़ पौधों से सम्बंधित कोई किताब मिलती है तो उसे पढ़े बिना नहीं रहते. Academy of Universal Global Peace द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की जा चुकी है तो कई अन्य राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी उन्हें मिल चुके हैं.

HT

धरती को हरा भरा करने के अपने जूनून के प्रति उनका समर्पण इतना है कि जब भी वे कहीं बाहर जाने के लिए घर से निकलते हैं तो अपनी गर्दन में एक गोलाकार बोर्ड फंसा लेते हैं, जिस पर लिखा रहता है, “वृक्षो रक्षति रक्षितः”. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन बेच डाली ताकि वे बीज और पौध खरीद सकें.

Logical Indian

रमैया दंपत्ति जब भी किसी के घर शादी, जन्मदिन या अन्य उत्सव में जाते हैं तो उपहार के रूप में कुछ और नहीं बल्कि बीज और पौध ही देते हैं. इलाके में उन्हें ‘Tree Man’ के नाम से भी जाना जाने लगा है.

‘गुस्ताखी माफ़’ द्वारा दरीपल्ली रमैया को शतायु होने की कामना के साथ साथ पद्मश्री सम्मान पर कोटिशः बधाइयां !

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY