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माँ को दूर से पानी लाना पड़ता था इसलिए बेटियों ने घर में ही खोद दिया कुआँ

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आज भी भारतीय समाज में ऐसी सोच बनी हुई है कि बेटा माँ बाप का सहारा होता है जबकि बेटियाँ तो पराई होती हैं. हालांकि सच्चाई ये है कि ऐसे अनेकानेक उदाहरण है जब बेटियों ने बेटों के मुकाबले अपने माँ बाप को बढ़चढ़ कर सहारा दिया है.
ताज़ा उदाहरण छत्तीसगढ़ की दो बेटियों का है जिन्होंने अपनी माँ की तकलीफ को समझा और उसके लिए कुछ ऐसा किया जो शायद बेटा भी नहीं कर पाता. ये दो बेटियाँ हैं छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के विकासखंड मनेंद्रगढ़ के कछौड़ गांव की मजदूर परिवार की शांति और विज्ञांति.

इन दोनों की माँ जुकमूल हर रोज घर की जरूरत के लिए दो किलोमीटर दूर से पानी भरकर लाती थी. बेटियों से माँ की तकलीफ देखी नहीं जाती थी. एक दिन उन्होंने घर में ही कुआँ खोदने की बात कही तो सबने बच्चों की बात समझकर मजाक में टाल दिया. पर शान्ति और विज्ञान्ति मजाक नहीं कर रही थी.
एक दिन दोनों फावड़ा उठाकर खोदने जुट गईं कुआँ खोदने में. तब भी किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब दोनों ने हार नहीं मानी तो परिवार को अहसास हुआ कि बेटियाँ सचमुच कुआँ खोदने को लेकर गंभीर हैं.
फिर क्या था, अन्य लोग भी सहयोग करने में जुट गए. यहाँ तक कि प्रकृति ने भी सहयोग किया और उनके कुएं में मात्र 20 फीट पर ही पानी निकल आया.
आज इन दोनों बेटियों का अपने माँ के प्रति प्रेम और संवेदना की हर कोई तारीफ़ कर रहा है. छत्तीसगढ़ की संसदीय सचिव चंपादेवी पावले ने भी शान्ति और विज्ञान्ति के हौसले की तारीफ की है और हरसंभव मदद की बात कही है.

कौन कहता है बेटियाँ बेटों से कम होती हैं ?


(Source : NBT)

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