डिसिप्लिन चाहिए

डिसिप्लिन चाहिए

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एक आदमी सेना से रिटायर होकर आया तो उसने गाँव में दूध का व्यवसाय करने का सोचा.

इसके लिए उसने घर के पीछे एक बाड़ा बनवाया और चार भैंसे खरीद लीं.

लेकिन भैंसें कुछ ज्यादा ही आजादी-पसंद थीं सो जब भी वह उन्हें खोलता तो एक इधर एक उधर भागने लगतीं.

वह बेचारा उन्हें पकड़ते पकड़ते परेशान हो जाता.

पांच-छह दिन ऐसा ही चला फिर एक दिन उसे गुस्सा आ ही गया.

उसने लट्ठ उठाया और भैंसों के ऊपर पिल पड़ा

पत्नी चिल्लाई – “अरे इतना मत मारो … नहीं तो ये दूध नहीं देंगी !”

आदमी गुस्से से बोला – “साला मुझे दूध नहीं चाहिए … मुझे discipline चाहिए … discipline !”

 

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