क्या आपने कभी आती हुई छींक को रोका है ? ये खबर...

क्या आपने कभी आती हुई छींक को रोका है ? ये खबर पढ़ लीजिये, दुबारा नहीं करेंगे

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क्या आप कभी कभी तमीजदार दिखने के चक्कर में आती हुई छींक को दबाने या रोकने की कोशिश करते हैं ? यदि इसका उत्तर हाँ है तो समझ लीजिये कि बस गनीमत है आप सही सलामत हैं. छींक रोकना कितना खतरनाक साबित हो सकता है इसका अंदाजा आपको इस खबर से लग जाएगा.

डॉक्टरों की एक पत्रिका है The BMJ, जिसमें एक केस रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. इस रिपोर्ट के अनुसार एक 34 वर्षीय आदमी ने अपनी नाक और मुंह दबाकर छींक रोकने की कोशिश की. परिणामस्वरूप उसके गले की मांसपेशियों में छेद हो गया. तुरंत ही उसे अहसास हो गया कि उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है क्योंकि गले में असहनीय दर्द शुरू हो गया, कुछ भी निगलने में असमर्थ हो गया और आवाज भी बंद हो गई.

अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि उसके गले का पिछला हिस्सा जिसे फॉरनक्स कहा जाता है, छींक के दवाब के कारण टूट गया था. हालांकि उस आदमी की जान बच गई पर डॉक्टरों के अनुसार इसमें जान जा भी सकती थी.

छींक आते समय शरीर के अन्दर से बाहर आती हवा की रफ़्तार 100 मील प्रति घंटे से भी ज्यादा होती है साथ ही साँस की नली और छाती में बहुत दवाब होता है. ऐसे में छींक रोकने की कोशिश भीतर की नाजुक मांसपेशियों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती हैं.

हमेशा याद रखिये, जब छींक आये तो बस छींकना है, उसे रोकना नहीं है. ये हमारी नहीं, डॉक्टरों की सलाह है.

(Source)

 

 

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