चार चुटकुले, कर लीजिये दिन की शुरुआत मुस्कान के साथ

चार चुटकुले, कर लीजिये दिन की शुरुआत मुस्कान के साथ

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JOKE #1

एक औरत कोमा में चली गई . . .

पति मुर्दा समझ के जलाने चला

रास्ते में अर्थी एक खम्भे से टकरा गई

और

औरत को होश आ गया … और उसे वापस घर ले आये ..!!

एक साल बाद औरत सच में मर गई .

सब लोग राम -नाम सत्य बोलते जा रहे थे …

लेकिन…!!!

पति की जुबान पर एक ही बात थी …

खम्भा बचा के …!!
खम्भा बचा के …!!
खम्भा बचा के …!!

JOKE #2

शादी के 2 दिन  बाद आदमी उसी ब्यूटीपार्लर में गया जहां उसकी बीवी को दुल्हन बनाया गया था.

आदमी ने पार्लर वाली मैडम को iphone X का एक डिब्बा दिया और थैंक्स बोलकर चला आया.

आदमी के जाने के बाद मैडम ने ख़ुशी ख़ुशी डिब्बा खोला तो देखा कि उसमें पुराना Nokia 1100 रखा हुआ था. उसके नीचे एक चिट्ठी रखी हुई थी जिस पर लिखा था –

“SAME FEELINGS…”

JOKE #3

आदमी (अपने कवि दोस्त से) – क्यों भाई, आजकल कोई कविता नहीं लिख रहे हो ? क्या हुआ है ?

कवि – नहीं भाई, जिस लड़की के लिए लिखता था, उसकी शादी हो गई.

आदमी – फिर तो विरह रस में कविता और भी अच्छी बनेगी न भाई ?

कवि – तू समझ नहीं रहा भाई … उसकी शादी मुझसे ही हुई है !!

JOKE #4

एक M. R. (Medical Representative) एक डॉक्टर की बेटी से प्यार करता था. एक दिन हिम्मत करके उसने डॉक्टर से उसकी बेटी का हाथ माँगा पर डॉक्टर ने इनकार कर दिया.

कुछ दिनों बाद डॉक्टर ने अपनी बेटी की शादी एक डॉक्टर लड़के से करवा दी. परन्तु शादी के कुछ ही दिनों बाद वह डॉक्टर लड़का मर गया.

M. R. ने फिर डॉक्टर के सामने उसकी लड़की से शादी का प्रस्ताव रखा लेकिन डॉक्टर ने फिर मना कर दिया.

कुछ महीनों बाद डॉक्टर ने अपनी बेटी की शादी एक इंजीनियर से करवा दी लेकिन कुछ दिनों बाद इंजीनियर भी मर गया.

M. R. ने फिर शादी की इच्छा प्रकट की लेकिन डॉक्टर नहीं माना.

फिर डॉक्टर ने अपनी बेटी की शादी एक टीचर से करवा दी लेकिन कुछ दिनों में वह भी भगवान को प्यारा हो गया.

अंत में डॉक्टर ने खिसियाकर अपनी बेटी की शादी उसी M. R. से करवा दी.

महीना गुजर गया, छह महीने गुजर गए, धीरे धीरे साल भी गुजर गया लेकिन M. R. नहीं मरा.

इसी इंतज़ार में एक दिन डॉक्टर साहब खुद ही गुजर गए और यमराज के पास पहुंचे. जाते ही उन्होंने यमराज से पूछा – “आपने मुझसे मेरे तीन दामादों को छीन लिया लेकिन यह M. R. क्यों नहीं मरा ?”

यमराज गुस्से से बोले – “तो हम क्या करें ? वह जहाँ की कहकर जाता है वहाँ मिलता ही नहीं है ….

TP (Tour Program) में लिखा होता है सिवनी जा रहा हूँ, पर जाता है बालाघाट !

TP में लिखा होता है भोपाल, पर जाता है जबलपुर … !

हम तो अब तक यही सोच रहे हैं कि इसे पकड़ें तो कहाँ पकड़ें ???”

 

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