एक शादीशुदा आदमी की शायरी

एक शादीशुदा आदमी की शायरी

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एक शादीशुदा आदमी की शायरी –

‘मांग भरने की सजा,

कुछ इस तरह पा रहा हूँ …

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मांग पूरी करने के चक्कर में,

मांग-मांग के खा रहा हूँ !!!

Sent By : Pushpendra Singh, Dhaulpur.

 

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