Funny Ghazal (Shayari) by a puzzled husband

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एक दुखी पति की शायरी …. पत्नी के नाम 

चौबीस घंटे लड़ना मुझसे है काम तेरा
रक्खा है करके तूने जीना हराम मेरा

अंगरेज बन के आई घर में तू मेरे गोरी
मैं बन के रह गया हूँ काला गुलाम तेरा

बेरोज़गार था मैं अब काम से हूँ बेदम
उस पर भी लानतें हैं तेरी इनाम मेरा

मर्ज़ी का था मैं मालिक अब हुक्म बजाता हूँ
क्या खूब कर दिया है तूने इंतजाम मेरा

कोल्हू के बैल जैसा मेरा हाल हो गया है
चक्कर लगा रहा हूँ बस सुबहो-शाम तेरा

आफ़त की है तू पुडिया मेरी जान की है दुश्मन
ऐ मुश्किलों की मलिका तुझको प्रणाम मेरा

कुछ लोग बीवियों से डरते नहीं, सुना है
ऐसे बहादुरों को फर्शी सलाम मेरा

– अनाम

 

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