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पढ़ी-लिखी नहीं हैं लेकिन अचार बेच कर 2 करोड़ कमाती हैं कृष्णा यादव

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महिला दिवस के दिन राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होने वाली गुडगाँव की कृष्णा यादव की कहानी देश की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक हो सकती है. अनपढ़ कृष्णा ने व्यावसायिक सफलता के मामले में अच्छे-अच्छे पढ़े लिखों को मात दे दी है.

गुडगाँव की कृष्णा यादव ने 500 रुपये की पूँजी से अचार बनाने का काम शुरू किया था और आज उनके बिजनेस का टर्नओवर 2 करोड़ रुपये सालाना है. उन्हें कृषि विभाग के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है.

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अपने पति के साथ कृष्णा यादव

उत्तरप्रदेश से हरियाणा आकर बसे गोवर्धन और कृष्णा यादव ने शुरू-शुरू में छोटी सी जमीन में सब्जी उगाने का काम शुरू किया था. पति के कहने पर कृष्णा ने कृषि विज्ञान केंद्र में तीन महीने का प्रशिक्षण लिया और अपने खेत की सब्जी का ही अचार बनाना प्रारम्भ कर दिया.

मार्केटिंग करने के लिए साधन नहीं थे सो खुद ही सड़क पर अचार बेचने लगीं. धीरे धीरे उनके अचार का स्वाद लोगों की जबान पर चढ़ना शुरू हुआ और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

एक छोटे से कमरे में मात्र दो लोगों द्वारा शुरू किये गए कारोबार से आज उनके गाँव की लगभग पांच सौ महिलायें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुईं हैं.

कृष्णा ने दिखा दिया है कि सफल होने के लिए शिक्षा और पूँजी नहीं, लगन और मेहनत ज्यादा मायने रखती है.

उनकी उद्यमिता को नमन !

(समाचार : भास्कर)

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