अपने नाम की गेंद (Motivational Story)

अपने नाम की गेंद (Motivational Story)

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एक बार एक संत एक छोटे से गाँव में प्रवचन कर रहे थे. उनके सामने गेंदों (balls) से भरी एक बड़ी सी टोकरी रखी थी.

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अचानक उन्होंने प्रवचन बीच में रोककर अपने एक शिष्य को बुलाया और सभी ग्रामीणों को एक-एक गेंद देने को कहा.

शिष्य ने संत की आज्ञा का पालन करते हुए सभी ग्रामीणों, जिनकी संख्या 70 – 80 के आसपास होगी, एक एक गेंद दे दी.

इसके बाद  संत बोले – “अब हर व्यक्ति अपनी-अपनी गेंद पर अपना नाम लिखो और वापस उसी टोकरी में रख दो …”

जब सभी ग्रामीणों ने  नाम लिख कर गेंदें  वापस टोकरी में रख दीं तो संत ने उन्हें अपने सामने बिछे फर्श पर फैला दिया और ग्रामीणों से बोले – “अब हर व्यक्ति 5 मिनट के अन्दर अपने नाम की गेंद ढूँढ कर इसमें से निकाल ले …”

सभी ग्रामीण जल्दी-जल्दी अपने-अपने नाम की गेंद ढूँढने में लग गए …

एक दूसरे को धकियाते हुए, अफरातफरी में पूरे पांच मिनट निकल गए मगर  कोई भी अपने नाम की गेंद नहीं ढूँढ पाया.

संत बोले – “अब सभी लोग एक-एक गेंद उठा लो चाहे वो किसी के भी नाम की हो, और फिर उस पर जिसका नाम लिखा हो उसे बुलाकर दे दो …”

और इस बार 5 मिनट से भी कम समय में सभी गेंदें सही व्यक्तियों के हाथों में पहुँच गईं.

संत ने आगे कहा – “जीवन में भी कुछ ऐसा ही होता हैं. यदि हम थोड़ी देर के लिए मान लें कि ये गेंद न होकर हमारी ख़ुशी है तो ज़रा सोचो कि अभी आपने क्या किया ? आप सभी पागलों की तरह अपनी-अपनी वाली ख़ुशी ढूँढ रहे थे पर वो किसी को मिल नहीं रही थी, क्योंकि आपके समय कम था, ठीक वैसे ही जैसे हमारा जीवन काल. परन्तु  जैसे ही आपने अपनी ख़ुशी की परवाह न करके  दूसरों की ख़ुशी उन्हें देना शुरू  किया, सबको उतने ही समय में अपनी अपनी ख़ुशी मिल गई….”

MORAL :  आप दूसरों को उनकी खुशियाँ बांटो. कोई न कोई आपको भी आपकी ख़ुशी लाकर जरूर देगा.

 

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