मेंढ़कों के व्यवहार का अध्ययन

मेंढ़कों के व्यवहार का अध्ययन

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एक जीवविज्ञानी मेंढ़कों के व्यवहार का अध्ययन कर रहा था। वह अपनी प्रयोगशाला में एक मेंढ़क लाया, उसे फर्श पर रखा और बोला – ”चलो कूदो !” मेंढ़क उछला और कमरे के दूसरे कोने में पहुंच गया। वैज्ञानिक ने दूरी नापकर अपनी नोटबुक में लिखा – ”मेंढ़क चार टांगों के साथ आठ फीट तक उछलता है।”
फिर उसने मेंढ़क की अगली दो टांगें काट दी और बोला – ”चलो कूदो, चलो !” मेंढ़क अपने स्थान से उचटकर थोड़ी दूर पर जा गिरा। वैज्ञानिक ने अपनी नोटबुक में लिखा – ”मेंढ़क दो टांगों के साथ तीन फीट तक उछलता है।”
इसके बाद वैज्ञानिक ने मेंढ़क की पीछे की भी दोनों टांगे काट दीं और मेंढ़क से बोला – ”चलो कूदो!”
मेंढ़क अपनी जगह पड़ा था। वैज्ञानिक ने फिर कहा – ”कूदो! कूदो! चलो कूदो!” पर मेंढ़क टस से मस नहीं हुआ।
वैज्ञानिक ने बार बार आदेश दिया पर मेंढ़क जैसा पड़ा था वैसा ही पड़ा रहा ।
वैज्ञानिक ने अपनी नोटबुक में अंतिम निष्कर्ष लिखा – ”चारों टांगें काटने के बाद मेंढ़क बहरा हो जाता है।”

 

7 COMMENTS

  1. वैज्ञानिक पागल था ये जो मेंढक की टांगे इतनी बेरहमी से काट रहा था.

  2. चार टांगे काटने के बाद वैज्ञानिक गुंगा हो गया. इसीलिए मेंढक को उसकी आवाज सुनाई नहीं दी.

  3. CHARO TAANGEI KATNE KE बाद बैज्ञानिक बहरा हो गया AUR मेंद्तक की आवाज़ सुन नहीं पाया.

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