इतना अंतर क्यों है ?

इतना अंतर क्यों है ?

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एक मोटर मेकेनिक कार के इंजिन के पुर्जे खोल कर सुधार रहा था कि तभी शहर के नामचीन हार्ट सर्जन अपनी कार ठीक करवाने उसकी गैराज में  आ पहुंचे.

मेकेनिक ने डॉक्टर साहब से व्यंगपूर्वक कहा – “ज़रा इस इंजिन को देखिये डॉक्टर साहब. मैंने इसके दिल को खोलकर वाल्व निकाले  और सुधार कर वापिस लगा दिए हैं. कुछ ऐसा ही काम आप भी करते हैं. फिर हमारी सेलरी में इतना अंतर क्यूँ है ?”

डॉक्टर साहब मुस्कुराए और धीरे से मेकेनिक के कान में बोले – “यही काम तब करके दिखाओ जब इंजिन चालू हो …. !”

 

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