और नहीं सुन सकता

और नहीं सुन सकता

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श्याम ने अपने दोस्त सुरजीत से पूछा – ”सुरजीत भाई, घर के बाहर क्यों खड़े हो और यह चोटें कैसे लगीं ?”
सुरजीत – ”हुआ यूं कि …..”
श्याम (बीच में ही बात काटते हुए) – ”कितनी बार कहा कि लोगों से झगड़ा मत किया करो। कम्बख्त ने मार मार कर तेरा क्या हाल कर दिया है। बुरा हो उसका … कीड़े पड़ें उसे …।”
सुरजीत – ”बस, बस, मैं अपनी पत्नी के बारे में और गलत बातें नहीं सुन सकता ।”

 

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