खुशी का राज

खुशी का राज

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एक आदमी, जो किसी दुर्घटना में अपना एक हाथ गंवा बैठा था, अपनी जिंदगी से बहुत निराश हो गया। उसने आत्महत्या करने की ठान ली ।

एक दिन, वह एक इमारत की बीसवीं मंजिल पर चढ़ गया और नीचे कूदने की तैयारी में था कि तभी उसने नीचे एक आदमी को जाते देखा जिसके दोनों हाथ कटे हुये थे। उसने देखा कि अचानक उस आदमी ने गली में नाचना शुरू कर दिया। यह दृश्य देखकर वह ठिठक गया। उसे अपने ऊपर बहुत शर्म आई। वह सोचने लगा कि जिस आदमी के दोनों हाथ कटे हुये हैं वह कितनी मस्ती में नाच रहा है और एक मैं हूं एक हाथ साबुत होते हुये भी आत्महत्या करने जा रहा हूं।

अपने आपको धिक्कारता हुआ वह नीचे उतर आया और उस बिना हाथ वाले आदमी के पास पहुंचकर बोला – ”दोस्त, अभी मैं उस बीसवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने वाला था क्योंकि मेरे एक ही हाथ बचा है! और एक तुम हो कि जिसके एक भी हाथ नहीं है इस तरह नाच रहे हो! तुम्हारी खुशी का राज क्या है ?”

दोनों हाथ कटे हुये वाला आदमी बोला – ”अरेऽऽ ! …. मैं कोई खुशी में नहीं नाच रहा हूं……! मेरी नाक में बड़ी तेज खुजली हो रही है …..!”

 

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