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उलझन

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badman

एक समाचार पत्र के ‘पाठकों की उलझन’ वाले कॉलम में एक पाठक ने अपनी उलझन को कुछ तरह से पेश किया-

“संपादक महोदय, लोग मुझे बाबू के नाम से जानते हैं। मेरी उम्र 34 साल है। मैं इस समय लूट के आरोप में सजा काट रहा हूँ। जेल में ही मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई। वह भी वहां सजा काट रही है। हम दोनो एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं। कुछ दिन में ही जेल से छूटने वाले हैं। अब वह लड़की मुझसे मेरे परिवार के बारे में पूछ रही है।”
“अब यह बात पूरे शहर को पता है कि मेरा बाप जेबकतरा है, मां नकली शराब बेचती है, बहल कॉलगर्ल है। मेरे दो भाई हैं। एक खून के इलजाम में जेल में है। और दूसरा…… वह कुछ नहीं पूना की एक कंपनी में मैकेनिक है बेचारा।”
“श्रीमान वह लड़की भोली और मासूम है। पता नहीं वह बर्दाश्त कर पायेगी या नहीं! आप ही बताइये उसे अपने पूना वाले भाई के बारे में बताऊँ या नहीं!!!!!!”

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