सबसे बड़े विद्वान

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एक हवाईजहाज में चार लोग सवार थे – पायलट, एक किशोर, एक बुजुर्ग और एक दार्शनिक। उड़ान के दौरान अचानक विमान के इंजन में खराबी आ गई । पायलट ने घोषणा की कि अब इस विमान का बचना संभव नहीं है और विमान में सिर्फ तीन ही पैराशूट हैं। किसी एक को तो अवश्य ही मरना होगा। इतना कहकर पायलट फुर्ती से अपने केबिन से निकला और बोला – चूंकि मुझे इस खराबी से संबंधित जानकारी हेडक्वार्टर को देनी होगी अत: मेरा बचना जरूरी है। इतना कहकर उसने एक पैराशूट उठाया और कूद गया। अब दो पैराशूट बचे। दार्शनिक महोदय अपने स्थान से उठे और बोले – मैंने ऑक्सफोर्ड और केम्ब्रिज में पढ़ाई की है। ढेर सारी किताबें लिखीं हैं। मेरे जैसे विद्वान दुनिया में कम ही हैं । अभी दुनिया को मेरी विद्वता की बहुत जरूरत है अत: मेरा बचना बहुत जरूरी है। इतना कहकर उन्होंने भी एक पैराशूट उठाया और कूद गए।

अब सिर्फ एक पैराशूट बचा था। बुजुर्ग सज्जन ने किशोर की ओर देखा और कहा – “बेटा, मैं अपनी जिंदगी जी चुका हूं और दो-चार साल में वैसे भी मर जाने वाला हूं। तुम्हारे सामने अभी पूरी जिंदगी पड़ी है। तुम यह पैराशूट उठाओ और कूद जाओ ।”

किशोर बोला – ” चिन्ता मत करो, हम दोनों ही बच जाएंगे। दुनिया के सबसे बड़े विद्वान व्यक्ति पैराशूट की जगह मेरा कपड़ों का बैग उठाकर कूद गए हैं … !”

Sent By : Pramod Gupta, Gohad (MP)

 

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