सौ रुपए आखिर सौ रुपए होते हैं

सौ रुपए आखिर सौ रुपए होते हैं

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छगन और मगन एक मेले में गए । वहां एक हेलिकॉप्टर आया हुआ था जो मेले का चक्कर लगवाने के सौ रुपए लेता था। मगन हेलिकॉप्टर की सवारी करना चाहता था पर छगन बहुत कंजूस था। बोला – यार, पांच मिनट की सवारी करके तू कौन सा राजा बन जाएगा। सौ रुपए आखिर सौ रुपए होते हैं ….

मगन फिर भी जिद कर रहा था और छगन बार-बार यही कहे जा रहा था कि – समझा कर, सौ रुपए आखिर सौ रुपए होते हैं यार ।

उनकी बातचीत पायलट ने सुन ली। वह बोला – सुनो, मैं तुम लोगों से कोई पैसा नहीं लूंगा। लेकिन शर्त यह होगी कि सवारी के दौरान तुम दोनों में से कोई भी एक शब्द भी नहीं बोलेगा। अगर बोला तो सौ रुपए लग जाएंगे।

उन्होंने ने शर्त मान ली। पायलट ने उन्हें पिछली सीट पर बिठाया और उड़ गया। आसमान में पायलट ने खूब कलाबाजियां की ताकि उन दोनों की आवाज निकलवा सके पर पीछे की सीट से कोई नहीं बोला। आखिर जब वे नीचे उतरने लगे तब पायलट ने कहा – अब तुम लोग बोल सकते हो । यह बताओ, मैंने इतनी कलाबाजियां कीं । तुम्हें डर नहीं लगा । न तुम चीखे न चिल्लाए…..।

अब छगन बोला – डर तो लगा था। और उस वक्त तो मेरी चीख निकल ही गई होती जब मगन नीचे गिरा…… पर तुम समझते हो यार, सौ रुपए आखिर सौ रुपए होते हैं …..

 

3 COMMENTS

  1. एक बार एक कंजूस ने apne बेटे को स्कूल के टूर per नहीं भेजा क्योकि बस का किराया २५ रूपए था

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