सरकारी काम

सरकारी काम

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तीन आदमी एक सड़क के किनारे पर काम कर रहे थे। एक आदमी 2-3 फीट गहरा गङ्ढा खोदता था और दूसरा उसे फिर मिट्टी से भर देता था। तब तक पहला आदमी नया गङ्ढा खोद लेता था और दूसरा आदमी उसे भी मिट्टी से भर देता था। काफी देर से यही क्रम चल रहा था। तीसरा आदमी सड़क किनारे ही एक पेड़ की छाया में लेटा हुआ था.
एक राहगीर काफी देर से इस कार्यक्रम को देख रहा था। आखिरकार उससे रहा नहीं गया और उसने  पूछ ही लिया – यहां क्या काम हो रहा है ?

“हम सरकारी काम कर रहे हैं ” – उनमें से एक आदमी ने बताया।

“वो तो मैं देख ही रहा हूं। लेकिन तुम लोग गङ्ढा खोदते हो फिर उसे भर देते हो फिर खोदते हो फिर भर देते हो। आखिर इस काम से हासिल क्या हो रहा है। क्या यह देश के धन की बर्बादी नहीं है ? ” राहगीर ने थोड़ा गुस्से से कहा।

“जी नहीं श्रीमान । हम तो अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। मैं आपको समझाता हूं।” पहले आदमी ने अपना पसीना पोंछते हुये कहा ।

“यहां हम कुल तीन आदमियों की डयूटी है। मैं, मोहन और वह जो पेड़ की छाया में लेटा है श्याम। हम लोग यहां पौधारोपण कार्य के लिये लगाये गये हैं। मेरा काम है गङ्ढा खोदना,  श्याम का काम है उसमें पौधा लगाना और मोहन का काम है उस गङ्ढे में मिट्टी डालना ।”

“अब चूंकि श्याम की तबीयत आज खराब है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि हम दोनों भी अपना काम न करें।

 

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