भारतीय पतियों ने उठाई घर में ‘बोलने का अधिकार’ देने की मांग

भारतीय पतियों ने उठाई घर में ‘बोलने का अधिकार’ देने की मांग

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नई दिल्ली – पाकिस्तान में पुरुषों को पत्नी की पिटाई करने का अधिकार मिलने सम्बन्धी खबर के मीडिया में आने के बाद भारत में भी हलचल शुरू हो गई है. इसी सिलसिले में ‘अखिल भारतीय पत्नी पीड़ित मंच’ की कल रात एक गुप्त स्थान पर आकस्मिक मीटिंग आयोजित की गई.

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Source : Dailymoss

इस मीटिंग में सदस्यों ने इस बात को लेकर गहन चिंता व्यक्त की कि एक ओर जहां हमारी सरकार पतियों के अधिकारों को लेकर कतई गंभीर नहीं है वहीं कल को हम में से ही कटकर अलग हुआ पाकिस्तान, पतियों को अधिकार देने के मामले में भारत से मीलों आगे निकलने जा रहा है.

एक सदस्य ने जहां इस पाकिस्तानी विचार को क्रांतिकारी और युग परिवर्तनकारी बताया तो वहीं एक दूसरे सदस्य ने इस बात के लिए अपनी सरकार को कोसा कि वह पतियों को अधिकार देने के मामले में पाकिस्तान जैसे देश से पिछड़ रही है.

अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया गया जिसमें कहा गया कि भारत में भी अब पतियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने का समय आ गया है. अब जब हमारा पडोसी देश सामाजिक सुधारों के मामले में तरक्की की राह पर अग्रसर है तो हम कब तक इस पिछड़ी और दकियानूस व्यवस्था में रहकर शोषित उत्पीडित बने रहेंगे.

इस हेतु गहन विचारविमर्श के बाद सर्वसम्मति से एक मांगपत्र तैयार किया गया जिसे सरकार को सौंपा जाएगा.

इस मांगपत्र की कुछ प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं –

1. पति को भी घरेलू मामलों में बोलने का अधिकार होना चाहिए. आखिर हम कब तक सिर्फ राजनीति और क्रिकेट की चर्चा तक सीमित रहेंगे ?

2. सप्ताह में एक दिन पति को भी अपनी पसंद की सब्जी बनवाने का अधिकार होना चाहिए. सरकार चाहे तो लौकी और कद्दू को बैन भी कर सकती है.

3. रोज़ कम से कम एक घंटे के लिए टीवी का रिमोट पति के हाथ में दिया जाए. साथ ही क्रिकेट मैच वाले दिन बीवी सीरियल देखने की जिद ना करे.

4. हफ्ते में कम से कम एक दिन रात को देर से घर आने की इजाज़त होनी चाहिए. सवाल-जवाब करने पर पत्नी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए.

5. अपनी कमाई का कम से कम पांच प्रतिशत अपनी मर्ज़ी से खर्च करने का अधिकार होना चाहिए.

6. पतियों के लिए अलग से हेल्पलाइन सेवा शुरू की जाए ताकि आपात स्थिति में एक फ़ोन करने पर पीड़ित पति को तुरंत प्रोटेक्शन उपलब्ध कराया जा सके.

ऐसी ही अन्य कुछ छिटपुट मांगों के साथ इस मांगपत्र के फाइनल होते ही सभी सदस्य अपना-अपना मुँह छुपाते हुए घरों की ओर लपक लिए.

(Disclaimer – उपरोक्त आर्टिकल शुद्ध रूप से हास्य के प्रयोजन से लिखा गया है. कृपया गंभीरता से न लें.)

 

 

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