वो भारतीय जिसने सबसे पहले एवरेस्ट की ऊंचाई नापी थी, पर आप...

वो भारतीय जिसने सबसे पहले एवरेस्ट की ऊंचाई नापी थी, पर आप शायद नाम भी न जानते हों

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8850 मीटर ऊँची दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट के बारे में तो आप सबने सुना-पढ़ा होगा पर क्या आपको इस चीज का अंदाजा है कि इस चोटी की ऊंचाई को सबसे पहले एक भारतीय ने मापा था ना कि ब्रिटिश सरकार के किसी अधिकारी ने.वह भारतीय था राधानाथ सिकदर जो इतने बड़े योगदान के बाद भी इतिहास के पन्नो में कही खो गया.जिस शख्स की शोहरत पूरी दुनिया में होनी चाहिए उसके बारे में आज शायद ही किसी को पता होगा..

अक्टूबर 1813 में जोरासंको(कलकत्ता) में जन्मे राधानाथ ने अपनी पढाई हिन्दू स्कूल(सम्प्रति प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय) से की. गणित उनका प्रिय विषय था. उनकी प्रतिभा का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने त्रिकोणमिति से सम्बन्धित कॉमन टेन्जेट के बारे में नया शोध किया और लोगो की नजरो में आये. पर इससे भी महत्वपूर्ण कार्य होना अभी बाकी था….

ब्रिटिश सरकार ने भारत का मानचित्र तैयार करने और अन्य सर्वेक्षणों के लिए एक इकाई के रूप में देहरादून में ”सर्वे ऑफ़ इंडिया’ का कार्यालय स्थापित किया.जून 1830 में सर जॉर्ज एवरेस्ट को सर्वेयर जनरल ऑफ़ इंडिया बनाकर भारत भेजा गया.उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की जरुरत थी जो स्फेरिकल त्रिकोणमिति में विशेषज्ञ हो.तब राधानाथ ने उनके साथ काम करना प्रारम्भ किया.अगले सर्वेयर जनरल एन्ड्रू स्कॉट वा(1843) ने ‘पीक XV’ जो की अंग्रेजो के अनुसार कंचनजंघा से ऊँची चोटी हो सकती थी,को मापने का दायित्व सिकदर को सौंपा.

स्कॉट वा से मिली इस बड़ी जिम्मेदारी को सिकदर ने चुनौती की तरह लिया.39 वर्षीय सिकदर ने करीब 800 कि.मी. दूर से थियोडोलाइट मशीन लगाकर अपना काम शुरू किया काफी मशक्कत के बाद 1852 में वे इस नतीजे पर पहुचे की ‘पीक XV’ की ऊंचाई 29002 फीट है जो विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत है.1856 में इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर दी गयी.दुर्भाग्य की बात यह की जब इस चोटी के नामकरण की बात आई तो इसका नाम सर एवरेस्ट के नाम पर रखा गया…

पर इस महत्वपूर्ण खोज ने राधानाथ सिकदर को हमेशा के लिए अमर कर दिया और अगर तब भारत अंग्रेजो का गुलाम ना होता तो इस शायद चोटी को आज हम ‘माउंट सिकदर’ के नाम से ही जानते….

 

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