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पुराने जमाने में बनी थी यह हिंदी फिल्म जिसकी कमाई का रिकॉर्ड न बाहुबली तोड़ पाई और न दंगल

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‘दंगल’ और ‘बाहुबली’ भारतीय सिनेमा की दो ऐसी फ़िल्में हैं जिन्होंने कमाई के ऐसे रिकॉर्ड स्थापित किये हैं जिन्हें तोडना फिलहाल किसी और फिल्म के लिए नजर नहीं आता. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से लगभग 42 साल पहले एक ऐसी फिल्म बनी थी जिसकी कमाई का रिकॉर्ड ये फ़िल्में भी नहीं तोड़ पाईं हैं.
जी हाँ, 1975 में एक धार्मिक फिल्म आई थी ‘जय संतोषी माँ’ जिसने अपने बजट के अनुपात में इतनी कमाई की थी कि जिसका रिकॉर्ड आज भी नहीं टूटा है. महज 5 लाख रुपये में बनी इस फिल्म ने 5 करोड़ की कमाई की थी यानी कि अपने बजट से सौ गुना.

यदि हम ‘दंगल’ और ‘बाहुबली 2’ की बात करें तो इनका बजट लगभग 75 करोड़ और 250 करोड़ रुपये था. आज बेशक इन फिल्मों ने दो हजार करोड़ रुपये के आसपास की कमाई कर ली है लेकिन बजट के अनुपात में देखा जाए तो ये ‘जय संतोषी माँ’ से अभी बहुत पीछे है.
ख़ास बात ये है कि 1975 में ही ‘शोले’ और ‘दीवार’ भी रिलीज हुई थीं जिनमें उस समय के बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों ने काम किया था जबकि ‘जय संतोषी माँ’ में कोई भी नामचीन सितारा नहीं था. लेकिन इसके बावजूद इस फिल्म ने गोल्डन जुबली (50 सप्ताह) मनाई थी.

यहाँ एक और ध्यान देने वाली बात यह है कि उस जमाने में आज की तरह मल्टीप्लेक्स सिनेमाघर नहीं थे और टिकट दरें बहुत सस्ती थीं. आज की फिल्मों की बड़ी कमाई का एक कारण मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों की ऊंची टिकट दरें भी हैं जबकि उस जमाने में अच्छे से अच्छे सिनेमाघर की टिकट भी दस बारह रुपये से अधिक नहीं थी.
‘जय संतोषी माँ’ फिल्म के बारे में एक दिलचस्प किस्सा ये भी बताया जाता है कि बिहार के पटना में जब ये फिल्म लगी थी तो वहाँ एक आदमी ने सिनेमाघर के बाहर बैठकर ही लगभग डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर ली थी.
दरअसल ‘जय संतोषी माँ’ एक धार्मिक फिल्म थी इसलिए श्रद्धावश लोग अपने जूते चप्पल टाकीज के बाहर ही उतारकर भीतर जाते थे. वह आदमी दर्शकों के जूते चप्पलों की रखवाली करता था और बदले में चवन्नी अठन्नी लेता था. फिल्म महीनों तक चलती रही और कहना न होगा कि वह आदमी फिल्म उतरते उतरते लखपति हो गया.

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