मात्र एक रुपये के लिए (Sharabi Joke)

मात्र एक रुपये के लिए (Sharabi Joke)

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छक कर दारू पीने के बाद एक शराबी जब बार से निकला तो उसे चाय की तलब लगी. उसने आसपास नज़र दौड़ाई पर चाय की दुकान कहीं नज़र नहीं आई.

तब उसने वहीं खड़े एक आदमी से पूछा – “भाईसाहब, यहाँ चाय की दुकान कहाँ पर है ?”

आदमी ने बताया – “वो जहां गाय खडी है न, वहीं पर चाय की दुकान है …”

शराबी दुकान पर गया. चाय पी और पांच रुपये दिए.

चाय केवल चार रुपये की थी लेकिन दुकानदार के पास छुट्टे नहीं थे, इसलिए वह शराबी से बोला – “एक रूपया छुट्टा नहीं है … कल ले लेना.”

शराबी बोला – “ठीक है, भूलना नहीं. मैं कल शाम इसी वक़्त आकर ले जाऊँगा.” और इतना कहकर अपने घर चला गया.

दूसरे दिन जब शराबी फिर से पीकर निकला तो वही गाय एक दरजी की दुकान के सामने खडी थी.

शराबी दरजी से बोला – “मेरा एक रूपया दे दो …”

दरजी – “भिखारी है क्या ?”

शराबी – “तुमने ही तो कल कहा था कि एक रूपया छुट्टा नहीं है, कल ले लेना …!”

दरजी – “कल तू कब आया था मेरी दुकान पर ?”

शराबी – “भूल गए ? मैंने चाय पी थी और पांच रुपये दिए थे …”

दरजी – “साले, तुझे ये चाय की दुकान नज़र आती है …”, और खींचकर एक चांटा शराबी के गाल पर जड़ दिया.

शराबी (गाल सहलाते हुए) – “लानत है ऐसी ज़िन्दगी पर … स्साले ने एक रुपये के लिए अपना धंधा ही बदल लिया !!!”

 

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