कंगारू का नाम ‘कंगारू’ कैसे पड़ा, ये जानोगे तो मुस्कुरा उठोगे

कंगारू का नाम ‘कंगारू’ कैसे पड़ा, ये जानोगे तो मुस्कुरा उठोगे

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कंगारू ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक जानवर है और सारी दुनिया उसे कंगारू के नाम से ही जानती है. हाल ही में पढ़ते पढ़ते कंगारू के नामकरण से सम्बंधित एक दिलचस्प जानकारी हाथ लगी तो सोचा आपसे शेयर कर दूँ.
अठारहवीं सदी में जेम्स कुक नामक एक सुप्रसिद्ध अन्वेषणकर्ता और मानचित्रकार हुए हैं. वे ब्रिटिश रॉयल नेवी में बतौर कैप्टेन तैनात थे. उन्होंने अपने जीवन में कई समुद्री यात्राएँ कीं. उनसे जुड़ा एक किस्सा बहुत मशहूर है जो मैं आपको कंगारू के नामकरण के बारे में बताने के पहले सुनाना चाहता हूँ.

एक बार कैप्टेन कुक का जहाज समुद्र में यात्रा करते करते हवाई द्वीप पर जाकर रुका. जिस दिन कैप्टेन कुक ने हवाई पर कदम रखा, संयोग से उस दिन द्वीप पर रहने वाले आदिवासी एक त्यौहार मना रहे थे जिसमें प्रकृति को चलाने वाले देवता Lono की पूजा कर रहे थे.
हवाई के आदिवासियों ने न तो इससे पहले कभी जहाज देखा था और न ही कोई बाहरी आदमी. इतना बड़ा जहाज और सजे धजे यूरोपियन लोगों को देखकर उन्होंने समझा कि उनकी पूजा से प्रसन्न होकर Lono देवता खुद पधारे हैं. बेचारे आदिवासी तुरंत यूरोपीय देवताओं की आवभगत में लग गए और उनके सामने उपहार और चढ़ावे के ढेर लगा दिए.
पर अंग्रेज तो अंग्रेज ठहरे. उन्हें मामूली आदिवासियों का अपने प्रति इतना प्यार रास नहीं आया और उन्होंने उनके उपहारों और चढ़ावे को फेंक दिया. पर आदिवासी तो उन्हें देवता समझ रहे थे, इसलिए बेचारे फिर भी कुछ नहीं बोले. वह तो अचानक जेम्स कुक के एक साथी को दिल का दौरा पड़ा और वह वहीं ढेर हो गया.
आदिवासियों ने जब यह देखा कि ये तो हमारी तरह मरते भी हैं, तो वे समझ गए कि ये देवता नहीं हैं. बस फिर क्या था, पाँसा पलट गया.
खैर, हम आपको कंगारू के नामकरण के बारे में बता रहे थे. 1773 में कैप्टेन कुक ऑस्ट्रेलिया में थे. एक दिन उनके नेवी के कुछ साथी जंगलों से एक विचित्र से जीव को पकड़कर ले आये. किसी भी यूरोपियन ने ऐसा जीव पहले कभी नहीं देखा था जो अपने बच्चे को पेट में बनी थैली में लटका कर चलता हो.
कैप्टेन कुक ने एक स्थानीय आदिवासी को पकड़ा और उससे उस जीव का नाम पूछा. अब बेचारा आदिवासी कैप्टेन कुक की अंग्रेजी क्या समझता, सो वह बोला, “कंगारू”.
स्थानीय भाषा में कंगारू का मतलब था, “मुझे आपकी बात समझ में नहीं आई”, पर कैप्टेन कुक समझे कि इस जीव का नाम ही कंगारू है. और बस, कैप्टन कुक और उनके साथी उस जीव को कंगारू नाम से पुकारने लगे और धीरे धीरे सारी दुनिया में यही नाम प्रचलित हो गया.

 

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