विद्युत मंडल का इंजीनियर और केले वाला

विद्युत मंडल का इंजीनियर और केले वाला

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बिजली विभाग के दफ्तर के बाहर एक केले वाला ठेला लगाकर केले बेच रहा था.

जब दफ्तर की छुट्टी हुई तो विद्युत् मंडल के एक इंजिनियर ने केले वाले से पूछा – “केले क्या भाव हैं ?”

केले वाला – “किस काम में लोगे ?”

इंजिनियर – “क्या मतलब ?”

केले वाला – “मंदिर में चढाओ तो 10 रुपये किलो,

वृद्धाश्रम के लिए 15 रुपये किलो,

स्कूली बच्चों के लिए 20 रुपये किलो,

घर ले जाओ तो 25 रुपये किलो और

होटल के लिए 30 रुपये किलो … !”

इंजिनियर – “ये क्या बात हुई ? केले एक ही तरह के और भाव अलग अलग क्यों ?”

केले वाला – “ये तो अपना tariff है सर जी …. आप भी तो एक ही खम्भे से बिजली देते हो लेकिन घर के लिए अलग रेट, दूकान के लिए अलग रेट, फैक्ट्री के लिए अलग रेट … है कि नहीं ?”

*इंजीनियर साहब बेहोश*

 

 

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