आखिर अपने बड़ों पर ही जाते हैं बच्चे …..

आखिर अपने बड़ों पर ही जाते हैं बच्चे …..

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आखिर अपने बड़ों पर ही जाते हैं बच्चे …….

स्कूल के पहले दिन…
बेटा : पापा आपको मेरे स्कूल में बुलाया है !
बाप : क्या हुआ…?
बेटा : गणित के मास्टर ने पूछा 7×9 कितने..?
मैंने बोला ..63 !
बाप :…. तो ?
बेटा : तब उसने पूछा 9×7 …..कितने..?
बाप : तो गधे इसमें अंतर क्या है …?
बेटा : बिलकुल , मैंने भी ऐसे ही कहा !


——–
दूसरे दिन
——–
बेटा : पापा …आप मेरे स्कूल गए..?
बाप : नहीं ..!
बेटा : ठीक है… मेरे Gym मास्टर भी
…आपसे मिलना चाहते हैं ..!
बाप : अब …क्या हुआ ?
बेटा : उनने मुझे पहले कहा ….अपना दायाँ हाथ उठाओ, …
फिर कहा बायाँ हाथ उठाओ, …
फिर दायाँ पैर, फिर बायाँ पैर..!
बाप : तो अब क्या तू अपने पेट पर खडा होगा..?
बेटा : बिलकुल …मैंने भी यही कहा !
😟😟😧😧
———
तीसरे दिन
———
बेटा : पापा आप स्कूल गए कि नहीं !
बाप : नहीं गया क्यूँ …?
बेटा : मुझे स्कूल से निकाल दिया !
बाप : अब क्या कह दिया तूने ?
बेटा : मुझे प्रिंसीपल ने बुलाया ! मैंने अंदर जाकर देखा,
वहाँ गणित के मास्टर, जिम के मास्टर और हमारे डाँस
की मास्टरनी बैठी
थी !
बाप : डाँस की मास्टरनी …. वहाँ क्या
मुजरा कर रही थी …?
बेटा : बिलकुल ; पापा मैंने भी अंदर घुसते
ही यही पूछा..!!

 

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