इस कहानी में अजब पहेली है, आप सुलझा सकते हैं ?

इस कहानी में अजब पहेली है, आप सुलझा सकते हैं ?

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किसी शहर में एक वकील था जो क़ानून का बहुत बड़ा शिक्षक भी था. एक दिन उसके पास एक गरीब युवक आया और उसने वकील से क़ानून सीखने की इच्छा जाहिर की. युवक की माली हालत जानने के बाद वकील ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसकी फीस बहुत ज्यादा है और युवक उसे वहन नहीं कर पायेगा.

युवक ने बहुत अनुनय विनय की पर वकील नहीं माना. उसने साफ़ कह दिया कि बिना अपनी फीस लिए वह बिलकुल नहीं पढ़ायेगा. पढ़ना है तो फीस तो देनी पड़ेगी.

लेकिन युवक भी जिद का पक्का था. वह ठानकर आया था कि इसी वकील से क़ानून की पढ़ाई करेगा. आखिरकार उसने वकील के सामने एक प्रस्ताव रखा. उसने कहा कि पढ़ाई पूरी होने के बाद वह जैसे ही पहला केस जीतेगा, उनकी फीस अदा कर देगा.

वकील साहब भी अब तक समझ चुके थे कि युवक टलने वाला नहीं है, इसलिए इस प्रस्ताव पर मान गए. बाकायदा अग्रीमेंट हो गया.

युवक ने खूब मन लगा कर पढ़ाई की और वकील ने भी खूब मेहनत करके पढ़ाया. आखिरकार एक दिन वह लड़का वकील बन गया. लेकिन वह वकील तो बन गया पर दुर्भाग्य से कोई भी उसके पास मुकदमा लेकर नही आया. कई महीने गुजर गए पर उसे अपना पहला मुकदमा लड़ने के लिए नहीं मिला.

शर्त के अनुसार, उसे पहला मुकदमा जीतते ही अपने गुरु वकील साहब की फीस देनी थी लेकिन जीते तो तब, जब उसके पास कोई अपना मुकदमा लेकर आये और वह उसे लड़े.

उधर वकील साहब फीस न मिलने से बेचैन हो रहे थे. उनके सब्र की सीमा समाप्त हो गई. उन्होंने युवक के पास नोटिस भिजवाया कि उनकी फीस का इंतजाम करे. युवक ने भी कहलवा दिया कि अग्रीमेंट के अनुसार पहला मुकदमा जीतने पर फीस देने का तय हुआ था और अभी तक कोई मुकदमा आया ही नहीं.

वकील साहब यह सुनकर आगबबूला हो गये. उन्होंने युवक को अदालत में घसीट लेने की धमकी दी. युवक को भी ताव आ गया. उसने भी कह दिया कि जो मर्जी आये कीजिये.

आखिरकार वकील साहब ने लड़के के ऊपर मुकदमा ठोक दिया. अब दो परिस्थितियाँ बनती हैं, या तो युवक जीतेगा या फिर वकील. और दोनों व्यक्ति ही दोनों परिस्थितियों को लेकर खुश हैं.

युवक क्यों खुश है

युवक इसलिए खुश हैं क्योंकि वह सोच रहा है कि यदि वह यह केस जीत जाता है तो अदालत के फैसले के अनुसार कानूनन उसे पैसा नही देना पड़ेगा. और यदि हार जाता है तो अग्रीमेंट के मुताबिक़ उसे पैसा नहीं देना पड़ेगा क्योंकि  पैसा सिर्फ जीतने पर ही देना है.

वकील क्यों खुश है

उधर वकील साहब सोच रहे हैं कि यदि वे यह केस जीत जाते हैं तो अदालत के फैसले के अनुसार कानूनन उन्हें पैसा मिलेगा. और यदि हार जाते हैं तो अग्रीमेंट की शर्त के मुताबिक उन्हें पैसा मिलेगा क्योंकि यह युवक का पहला मुकदमा है जिसे वह जीतेगा.

कहने का मतलब दोनों ही स्थितियों में वकील सोच रहा है कि उसे पैसा मिलेगा और युवक सोच रहा है कि उसे पैसा नहीं देना पड़ेगा.

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