जीवन के कंकड़, पत्थर और रेत

जीवन के कंकड़, पत्थर और रेत

0
SHARE
दर्शनशास्त्र के एक प्रोफेसर तीन डिब्बे और एक शीशे का जार हाथ में लिए हुए कक्षा में आये. आज वे ज़िन्दगी का एक महत्त्वपूर्ण पाठ अपने छात्रों को पढ़ाना चाहते थे. कक्षा शुरू हुई तो प्रोफेसर ने तीनों डिब्बों को खोला.
उनमें से एक डिब्बे में पत्थर के टुकड़े, दूसरे में कंकड़ और तीसरे में रेत थी. सबसे पहले उन्होंने पत्थर के टुकड़े लिए और उन्हें जार में ऊपर तक भर दिया. फिर उन्होंने छात्रों से पूछा, “क्या जार पूरा भर गया है ?”. छात्रों ने कहा, “हाँ”.
अब उन्होंने ने कंकडों का डिब्बा खोला और जार को हिला हिला कर उसमें कंकड़ डालने लगे. ऐसा करने से पत्थरों के बीच जो जगह बची थी उसमें कंकड़ भर गए. एक बार उन्होंने फिर छात्रों से पूछा कि क्या जार अब भर गया है जिसका जवाब छात्रों ने फिर से हाँ में दिया.
अब प्रोफेसर ने तीसरा डिब्बा खोला जिसमें रेत रखी थी. अब वे धीरे धीरे रेत को जार में डालने लगे. जार को हिलाने पर बारीक रेत कंकडों और पत्थरों के बीच जाकर सेटल हो गई.
अब प्रोफेसर ने समझाना शुरू किया, “आज मैं ज़िन्दगी का एक महत्वपूर्ण पाठ आपको पढ़ाना चाहता हूँ. ये जार आपकी ज़िन्दगी को represent करता है. इस जार में जो पत्थर हैं वे आपकी ज़िन्दगी की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ें है जैसे आपके परिवार के सदस्य, आपके बच्चे, आपका स्वास्थ्य आदि. ये वो चीज़ें हैं जिनके होने भर से आपकी ज़िन्दगी आपको पूर्ण लगेगी. “
“इस जार में जो कंकड़ हैं वे दूसरी महत्वपूर्ण चीज़ों को दर्शाते हैं जैसे आपका जॉब, आपका घर आदि.”
“तीसरी चीज़ है रेत जो ज़िन्दगी की बाकी अन्य छोटी छोटी चीज़ों को दर्शाती है.”
“समझने वाली बात यह है कि यदि आप जार को पहले रेत से भर देंगे तो इसमें कंकड़ और पत्थरों के लिए जगह ही नहीं बचेगी. हमारी ज़िन्दगी भी ठीक इसी तरह ही है. यदि हम अपना सारा समय और ऊर्जा छोटी छोटी चीज़ों में लगा देंगे तो हमारे पास महत्त्वपूर्ण चीज़ों के लिए न तो समय बचेगा और न ही ऊर्जा. ज़िन्दगी में खुश रहने के लिए जरूरी है कि आप सबसे पहले महत्वपूर्ण चीज़ों पर ध्यान दीजिये. जीवनसाथी को समय दीजिये, बच्चों के साथ खेलिए, मातापिता का ख़याल रखिये. यकीन मानिए फिर आप कम महत्वपूर्ण चीज़ों को भी अच्छी तरह से हैंडल कर पायेंगे.”
“कहने का मतलब पहले बड़े पत्थरों पर ध्यान देंगे तो फिर इस जार की तरह कंकड़ और रेत के लिए भी जगह बची रहेगी.”
प्रोफेसर की बात सभी छात्रों को समझ में आ गई थी.

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY