नागालैंड में आज भी रखी हैं महाभारत काल की शतरंज की गोटियाँ

नागालैंड में आज भी रखी हैं महाभारत काल की शतरंज की गोटियाँ

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भारत में कई स्थानों पर ऐसी अनेकानेक चीज़ें मौजूद हैं जो रामायण और महाभारत कालीन इतिहास को दर्शाती हैं. ऐसी ही एक जगह है नागालैंड के दीमापुर स्थित यह शतरंज वाटिका. इस वाटिका में आज भी विशालकाय शतरंज की गोटियाँ रखी हुईं हैं. कहा जाता है कि इन गोटियों से भीम और उनके पुत्र घटोत्कच शतरंज खेला करते थे.

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बताया जाता है कि दीमापुर को पहले हिडिम्बापुर के नाम से जाना जाता था. भीम की पत्नी और घटोत्कच की माँ हिडिम्बा यहीं की थीं और यहीं भीम ने उनसे विवाह किया था. बताते हैं कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान बहुत सा समय इसी क्षेत्र में व्यतीत किया था.

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दीमापुर की एक जनजाति खुद को भीम की पत्नी हिडिम्बा का वंशज मानती है और उनकी पूजा करती है. यहाँ आज भी हिडिम्बा का बाड़ा है जहां राजबाड़ी में शतरंज की बड़ी-बड़ी गोटियाँ रखी हुईं हैं.

हालांकि समय के साथ इनमें से कई अब टूट-फूट चुकी हैं. स्थानीय निवासियों का मानना है कि इन्हीं गोटियों से भीम और उनके पुत्र घटोत्कच शतरंज खेला करते थे.

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हिडिम्ब का शहर दीमापुर प्राकृतिक रूप से बहुत ख़ूबसूरत होने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक शहर भी है. यहां पर कचारी शासनकाल में बने मन्दिर, तालाब और किले देखे जा सकते हैं. इनमें राजपुखूरी, पदमपुखूरी, बामुन पुखूरी और जोरपुखूरी आदि प्रमुख हैं.

 

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