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इस मंदिर में रखा है वह विशालकाय प्राचीन ढोल, जिसे महाबली भीम बजाया करते थे

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शिमला से करीब 100 किलोमीटर दूर एक खूबसूरत घाटी है जिसे करसोंग घाटी के नाम से जाना जाता है. हिमाचल प्रदेश की करसोंग घाटी अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ प्राचीन मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है.

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यहाँ स्थित तमाम प्राचीन मंदिरों में से एक ममलेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है.

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इस मंदिर में एक विशालकाय ढोल रखा हुआ है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह पांच पांडवों में से एक महाबली भीम का ढोल है.लगभग 2 मीटर लम्बा और 3 फीट ऊँचा यह ढोल यहाँ महाभारत काल से रखा हुआ बताया जाता है. कहते हैं कि इस स्थान पर पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय बिताया था.

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लोग बताते हैं कि भीम जब अकेले होते थे तब इस ढोल को बजाया करते थे.

यहाँ पर महाभारतकालीन गेंहू का एक दाना भी रखा हुआ है. इस दाने का वजन लगभग 250 ग्राम है. ऐसा माना जाता है कि इसे भी पांडवों ने ही उगाया था.

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ममलेश्वर मंदिर में 5 प्राचीन शिवलिंग भी स्थित हैं जो इसे पांडवों से जोड़ते हैं. यहाँ एक अग्निकुंड भी है जो हमेशा जलता रहता है. कहते हैं कि यह अग्निकुंड पांच हजार सालों से लगातार जल रहा है.

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इस अग्निकुंड से जुड़ी एक कहानी भी है कि जब पांडव अज्ञातवास में घूम रहे थे तब कुछ समय के लिए इस गाँव में रुके थे. तब इस गाँव में एक राक्षस ने पास ही एक गुफा में डेरा जमाया हुआ था. उस राक्षस के प्रकोप से बचने के लिए गाँव के लोगों ने उससे एक समझौता किया हुआ था कि वे रोज एक आदमी को उसका भोजन बनने के लिए उसके पास भेजेंगे, ताकि वह एक साथ ज्यादा लोगों को न मारे.

एक दिन उस घर के लडके का नम्बर आया जिसमें पांडव रूके हुए थे. उस लडके की मां को रोता देख पांडवो ने कारण पूछा तो उसने बताया कि आज मुझे अपने बेटे को राक्षस के पास भेजना है. अतिथि के तौर पर अपना धर्म निभाने के लिये पांडवो में से एक भीम उस लडके की बजाय खुद उस राक्षस के पास चले गए.

राक्षस की गुफा में जाकर भीम ने उसे युद्ध के लिए ललकारा. दोनों में भयंकर युद्ध हुआ पर अंत में भीम की विजय हुई और उन्होंने राक्षस को मार डाला. और इस तरह गाँव वालों को उसके डर से मुक्ति दिलाई. कहते हैं कि भीम की उस विजय की याद में ही यह अग्निकुंड प्रज्ज्वलित किया गया था जो आज तक लगातार जल रहा है.

ममलेश्वर मंदिर एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का मंदिर है. पुरातत्ववेत्ता भी इसमें रखी चीज़ों के अति प्राचीन होने की पुष्टि कर चुके हैं.

(Source : Bhaskar)

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