मुझे मालूम है वो कौन है

मुझे मालूम है वो कौन है

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एक पादरी साहब रविवार को चर्च में भाषण दे रहे थे.

“वो कौन है” – पादरी साहब गरजे – “जो भाई-भाई के इत्तफ़ाक में विघ्न डालता है ? जो बेटे को बाप से लड़ाता है ? जो पति को पत्नी के खून का प्यासा बनाता है ? जो माँ-बाप को अपनी औलाद से और औलाद को अपने माँ-बाप से नफ़रत करना सिखाता है ? जो बरसों के याराने ख़त्म कराता है ? कौन है ? कौन है वो ?”

एक पिद्दी सा आदमी पीछे से उठ कर खड़ा हुआ और बोला – “मुझे मालूम है पादरी साहब … शैतान ! शैतान है वो … ठीक है न ?”

पादरी साहब ने आह भरी, बाइबिल को बंद किया, आँखों से चश्मा उतारा, चेहरे का पसीना पोंछा और उस आदमी को घूरते हुए बोले – “हाँ, शैतान है वो, लेकिन, साले मैंने पूछा ही तो था, बताने को तो नहीं कहा था !!!”

 

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